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पूर्व मेयर विशाखा राउत की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पार्षद की सीट खाली रखने का निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर को मुंबई की पूर्व मेयर और शिवसेना (यूबीटी) की पार्षद विशाखा राउत की अयोग्यता से जुड़े मामले पर सुनवाई की। मामला उनके ओबीसी जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किए जाने और इसके आधार पर पार्षद पद से अयोग्य ठहराए जाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग और राउत की प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के शिंदे गुट की उम्मीदवार प्रिया सरवणकर को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।

पार्षद की सीट खाली रखने का निर्देश

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि विशाखा राउत के पास रही पार्षद की सीट को फिलहाल भरा नहीं जाए। अदालत ने कहा कि लंबित अपील पर अपीलीय प्राधिकरण स्वतंत्र रूप से फैसला करे और किसी प्रभाव में आए बिना मामले का निर्णय करे।

ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद

विशाखा राउत ने ओबीसी जाति प्रमाण पत्र अमान्य होने के बाद हुई अपनी अयोग्यता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने अपील की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि उनकी प्रतिद्वंद्वी उस पद पर बैठना चाहती हैं और ऐसा होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

सीट खाली रखने की दी गई दलील

इंदिरा जयसिंह ने अदालत के समक्ष कहा कि हाई कोर्ट के फैसले और चुनाव याचिका, दोनों की कार्यवाही पर रोक लगनी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक संबंधित मामलों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक पार्षद की सीट खाली रखी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अपील पर फैसला आने से पहले उनकी प्रतिद्वंद्वी को सीट पर बैठाने की कोशिश की जा सकती है।

वार्ड 191 से जीती थीं विशाखा राउत

विशाखा राउत ने वार्ड 191 से चुनाव जीता था। यह सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित थी। चुनाव में उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की उम्मीदवार प्रिया सरवणकर को हराया था। चुनाव के बाद जाति जांच समिति ने राउत के ओबीसी यानी कुनबी जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया।

जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद अयोग्यता

जाति प्रमाण पत्र अमान्य घोषित होने के बाद महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी की ओर से विशाखा राउत को पार्षद पद से अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई की गई। इसके बाद उनकी सीट खाली हो गई। राउत ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अयोग्यता से जुड़े फैसले को बरकरार रखा था।

अब चुनाव आयोग और प्रतिद्वंद्वी का पक्ष होगा अहम

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग और प्रिया सरवणकर को नोटिस जारी किया है। अदालत के निर्देश के मुताबिक वार्ड 191 की पार्षद सीट फिलहाल खाली रखी जाएगी। वहीं, विशाखा राउत की अयोग्यता और जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

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