
नई दिल्ली: भारतीय रसोई में सरसों के तेल का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। इसकी तीखी खुशबू और खास स्वाद खाने का जायका बढ़ाते हैं। खाना पकाने के अलावा कई लोग इसका उपयोग बालों और शरीर की मालिश के लिए भी करते हैं। सरसों के तेल में असंतृप्त वसा और कुछ लाभकारी पौध यौगिक पाए जाते हैं। हालांकि, इसके सभी कथित स्वास्थ्य लाभों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं और इसका इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी है।
1. हानिकारक सूक्ष्मजीवों के खिलाफ दिखाता है असर
कुछ प्रयोगशाला अध्ययनों में सरसों के तेल में मौजूद यौगिकों ने एस्चेरिचिया कोलाई और स्टैफिलोकोकस ऑरियस जैसे बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने की क्षमता दिखाई है। हालांकि, प्रयोगशाला में मिले परिणामों से यह साबित नहीं होता कि सरसों का तेल शरीर में संक्रमण का इलाज कर सकता है। किसी भी संक्रमण के लिए डॉक्टर की सलाह और उचित उपचार जरूरी है।
2. त्वचा और बालों की देखभाल में इस्तेमाल
सरसों का तेल कई घरों में त्वचा और बालों की मालिश के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मालिश से कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है, लेकिन सरसों का तेल झुर्रियां मिटाने या त्वचा संबंधी बीमारियों को ठीक करने का प्रमाणित उपचार नहीं है।
संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इससे जलन या एलर्जी हो सकती है। इसलिए त्वचा पर लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में परीक्षण करना बेहतर है। बच्चों और शिशुओं की त्वचा पर इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
3. मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में राहत
सरसों के तेल से मालिश करने पर कुछ लोगों को मांसपेशियों में आराम महसूस हो सकता है। तेल में मौजूद कुछ यौगिकों और वसा पर सूजन से जुड़े प्रभावों को लेकर शोध हुआ है, लेकिन गठिया या जोड़ों के दर्द को ठीक करने में इसकी प्रभावशीलता के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे, जोड़ों में सूजन हो या चलने-फिरने में परेशानी आए, तो केवल तेल की मालिश पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।
4. कैंसर से बचाव के दावों पर क्या कहता है शोध?
सरसों के बीज और उनसे जुड़े कुछ यौगिकों पर प्रयोगशाला तथा पशु-आधारित अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोध में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि पर संभावित प्रभाव देखे गए हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सरसों का तेल खाने या लगाने से मनुष्यों में कैंसर का खतरा कम होता है या बीमारी ठीक हो सकती है।
कैंसर से बचाव और उपचार के लिए प्रमाणित चिकित्सकीय उपायों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
5. दिल की सेहत के लिए कितना उपयोगी है सरसों का तेल?
सरसों के तेल में असंतृप्त वसा होती है, जो संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है। आहार में संतृप्त वसा की जगह उपयुक्त असंतृप्त वसा लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सरसों का तेल अपने आप रक्तचाप, रक्त शर्करा या खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने की गारंटी नहीं देता। दिल की सेहत के लिए तेल की मात्रा सीमित रखना, संतुलित भोजन करना और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
6. सूजन कम करने में मदद के दावे
सरसों के बीज और तेल में मौजूद कुछ वसा तथा पौध यौगिकों के सूजन से जुड़े प्रभावों पर शोध किया गया है। कुछ शुरुआती अध्ययनों में संभावित लाभ के संकेत मिले हैं, लेकिन गठिया, सोरायसिस या अन्य सूजन संबंधी बीमारियों के इलाज के रूप में सरसों के तेल की प्रभावशीलता स्थापित नहीं हुई है।
इसलिए इन बीमारियों से पीड़ित लोगों को निर्धारित दवाएं बंद करके तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
7. सर्दी-खांसी में इस्तेमाल करते समय रखें सावधानी
कुछ लोग सर्दी-जुकाम के दौरान सरसों के तेल को कपूर के साथ मिलाकर छाती पर लगाते हैं। हालांकि, इससे बीमारी ठीक होने या कफ दूर होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। कपूर और सरसों का तेल त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। कपूर को कभी निगलना नहीं चाहिए और इसे बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।
गर्म पानी में तेल डालकर भाप लेने से भी बचें, क्योंकि गर्म पानी से जलने का खतरा रहता है। सर्दी-खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार या लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
सरसों के तेल का इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
सरसों का तेल खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसकी मात्रा संतुलित रखें और तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल न करें। ध्यान दें कि कुछ देशों में इरुसिक एसिड की मात्रा को लेकर खाद्य सरसों के तेल पर विशेष नियम हैं। इसलिए खाने के लिए उपयुक्त और मानकों के अनुरूप उत्पाद ही चुनें। सरसों के तेल को किसी बीमारी का इलाज मानने के बजाय संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली का एक हिस्सा समझना बेहतर है।



