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दिवाली से पहले दिल्ली की हवा बनी जहरीली! AQI 389 पहुंचा, सांस लेना हुआ मुश्किल, GRAP-II लागू

नई दिल्ली: दिवाली से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 6 नवंबर की सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 389 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया है। बिगड़ते हालात को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-II के तहत उपाय लागू किए गए हैं।

कई इलाकों में AQI 400 के पार

CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई। IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474, पंजाबी बाग में 465, आरके पुरम में 443, ITO में 422, फिरोज शाह रोड पर 420 और इंडिया गेट के आसपास 403 दर्ज किया गया। इसके अलावा आनंद विहार और अक्षरधाम के आसपास AQI 359 रहा। IGI एयरपोर्ट टर्मिनल-3 पर 385, आया नगर में 393 और चांदनी चौक में 391 दर्ज किया गया।

GRAP-II के तहत पानी का छिड़काव शुरू

प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने GRAP-II के तहत कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत सड़कों पर धूल कम करने के लिए ट्रक पर लगे वॉटर स्प्रिंकलर तैनात किए गए हैं। इन वाहनों के जरिए अलग-अलग इलाकों में पानी का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि हवा में उड़ने वाली धूल को नियंत्रित किया जा सके।

मौसम विभाग ने धुंध और कोहरे का जताया अनुमान

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, शुक्रवार सुबह दिल्ली का तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आसमान मुख्य रूप से साफ रहा। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक हल्की धुंध छाए रहने का अनुमान जताया है। वहीं, 10 और 11 नवंबर को सुबह के समय घना कोहरा या धुंध देखने को मिल सकती है।

स्थानीय लोगों ने बताई प्रदूषण से परेशानी

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का असर आम लोगों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई दे रहा है। स्थानीय निवासी सर्वेश ने बताया कि सुबह के समय भी प्रदूषण इतना ज्यादा है कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर ट्रैफिक कम होने के बावजूद हवा में स्मॉग की मोटी परत दिखाई दे रही है। इसके कारण सांस लेने में तकलीफ, घबराहट और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं।

वहीं, 71 वर्षीय स्थानीय निवासी नेमीचंद शर्मा ने प्रदूषण के लिए अनियंत्रित शहरीकरण और प्रशासनिक उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि दिल्ली के विकास के नाम पर जिस तरह निर्माण और शहरी गतिविधियां बढ़ी हैं, उससे प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें प्रदूषण कम करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही हैं।

पराली जलाने को लेकर दिल्ली और पंजाब सरकार में आरोप-प्रत्यारोप

दिल्ली में प्रदूषण के बीच पराली जलाने का मुद्दा भी गरमा गया है। गुरुवार को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के धान की कटाई और पराली जलाने को लेकर दिए गए बयानों पर सवाल उठाए। सिरसा ने आरोप लगाया कि भगवंत मान ने इस संबंध में गलत जानकारी दी है और पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं का राष्ट्रीय राजधानी की हवा पर गंभीर असर पड़ रहा है।

शास्त्री पार्क स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) में मीडिया से बातचीत के दौरान सिरसा ने दावा किया कि पंजाब सरकार के अपने आंकड़ों के अनुसार राज्य में 77 प्रतिशत पराली जलाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में धान की कटाई शुरू नहीं होने की बात कही थी, जबकि सरकारी आंकड़े इससे अलग तस्वीर पेश करते हैं।

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