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IAS अधिकारी और IPS पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोप! उदयपुर में 20 और अलवर में 8 विला खरीदने की जांच, निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का भी आरोप

जयपुर: राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार को शिखर अग्रवाल के खिलाफ प्रारंभिक जांच दर्ज की। आरोप है कि उन्होंने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ। राज्य सरकार ने भी शुक्रवार को इस जांच को औपचारिक मंजूरी दे दी।

जांच शुरू होने से पहले बुधवार को अग्रवाल को अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर की स्थिति में रखा गया था। उस समय वह उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनात थे। पूरे मामले में उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदे गए विला की खरीद को लेकर कथित अनियमितताओं की पड़ताल की जा रही है।

निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए पद के दुरुपयोग का आरोप

एसीबी के बयान के मुताबिक, शिखर अग्रवाल पर अनंता ब्रांड के तहत होटल और रिसॉर्ट संचालित करने वाली कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के साथ मिलीभगत करने का आरोप है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस कथित मिलीभगत के जरिए कंपनी को कई तरह के अनुचित फायदे पहुंचाए गए।

इनमें रिसॉर्ट निर्माण से जुड़ी शर्तों में छूट देना, जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच किए बिना मंजूरी जारी करना और कंपनी को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराना शामिल है।

ब्यूरो का यह भी आरोप है कि अग्रवाल ने कंपनी के निदेशकों के साथ कथित सांठगांठ करके उनके अनंता रिसॉर्ट्स में खुद और परिवार के सदस्यों के नाम पर विला खरीदे।

उदयपुर में 20 और अलवर में खरीदे गए 8 विला

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मार्च 2026 में शिखर अग्रवाल और उनके परिवार ने उदयपुर के बुझदा रिसॉर्ट में विला खरीदे। इसके अलावा अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित कंपनी के रिसॉर्ट में भी संपत्तियां खरीदी गईं।

जांच के अनुसार, शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर ने उदयपुर के बुझदा रिसॉर्ट में 15-15 लाख रुपये की कीमत पर 10-10 विला खरीदे। वहीं, अलवर के अजबगढ़ रिसॉर्ट में उनके नाम पर 16.5-16.5 लाख रुपये की दर से आठ विला खरीदे गए।

इसके अलावा उनके दोनों बेटों ने करीब 15 लाख रुपये प्रति विला की कीमत पर चार विला खरीदे। परिवार के अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी लगभग 16.5 लाख रुपये प्रति विला की दर से चार अतिरिक्त विला खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है।

बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्तियां खरीदने का संदेह

एसीबी को संदेह है कि अग्रवाल के परिवार ने ये विला वास्तविक बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर हासिल किए। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि संपत्तियों की खरीद और कंपनी को दिए गए सरकारी लाभों के बीच कोई संबंध था या नहीं।

ब्यूरो के मुताबिक, विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी में सामने आया है कि अग्रवाल ने 27 मार्च 2026 को 20 विला की खरीद का पंजीकरण कराया था। इसी दिन वित्त विभाग ने गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए विशेष रियायती वित्तीय पैकेज भी जारी किया था।

वित्तीय पैकेज और विला खरीद के बीच संबंधों की जांच

जांच एजेंसी अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। आरोप है कि सरकारी पद पर रहते हुए शिखर अग्रवाल ने कंपनी के निदेशकों के साथ मिलकर उसे अनुचित लाभ पहुंचाया। इसके बदले परिवार के सदस्यों के नाम पर रिसॉर्ट में विला खरीदे गए।

एसीबी का दावा है कि इस कथित व्यवस्था से निजी कंपनी को फायदा हुआ और राजस्थान सरकार को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। फिलहाल मामले की प्रारंभिक जांच जारी है और एजेंसी संपत्तियों की खरीद, सरकारी मंजूरियों तथा वित्तीय पैकेज से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

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