अन्तर्राष्ट्रीय

सऊदी अरब के रुख से बदली अमेरिका की रणनीति? ईरान तनाव के बीच ट्रंप के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर लगा ब्रेक

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को लेकर नए दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के खिलाफ शुरू किए गए अमेरिकी अभियान “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को सऊदी अरब के दबाव के बाद रोकना पड़ा। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया की राजनीति और अमेरिका की सैन्य रणनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति पिछले कुछ समय में कई बार बदलती दिखाई दी। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। बाद में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ किसी तरह की युद्धविराम वार्ता नहीं होगी, लेकिन बाद में रुख बदलता नजर आया।

इसी बीच अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में “प्रोजेक्ट फ्रीडम” शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन महज 48 घंटे के भीतर इसे रोक दिया गया।

क्या था ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने 3 अप्रैल को होर्मुज क्षेत्र में “प्रोजेक्ट फ्रीडम” लॉन्च किया था। इस अभियान का उद्देश्य जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना और समुद्री गतिविधियों को सामान्य बनाए रखना था।

यह ऑपरेशन अमेरिकी सेना की निगरानी में शुरू किया गया था। हालांकि उस दौरान भी ईरानी नौसैनिक गतिविधियां और नाकाबंदी जारी रही। अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था।

ईरान की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव

अमेरिकी अभियान शुरू होने के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस दौरान ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाते हुए कई हमले किए, जबकि सऊदी अरब पर भी संभावित कार्रवाई की आशंका जताई जा रही थी।

इसी बढ़ते खतरे के बीच अमेरिका ने अचानक ऑपरेशन रोकने का फैसला लिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई चर्चाओं को जन्म दिया।

सऊदी अरब ने अमेरिका को एयरबेस इस्तेमाल करने से रोका: रिपोर्ट

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बताया गया कि सऊदी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी भी जताई।

सऊदी अरब का मानना था कि यदि क्षेत्र में व्यापक युद्ध शुरू होता है तो उसका सबसे ज्यादा असर खाड़ी देशों पर पड़ेगा। इसी वजह से रियाद ने सैन्य टकराव की बजाय बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाने पर जोर दिया।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सऊदी अरब ने ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक समाधान की वकालत की।

ट्रंप ने बातचीत का हवाला देकर रोका अभियान

इन घटनाक्रमों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सामने आए और उन्होंने कहा कि ईरान के साथ संभावित बातचीत की वजह से “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को रोकने का फैसला लिया गया।

हालांकि इस फैसले को लेकर अमेरिका के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों और खाड़ी देशों के दबाव ने अमेरिका की रणनीति को प्रभावित किया।

Related Articles

Back to top button