छत्तीसगढ़राज्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पति-पत्नी को एक-दूसरे की आय और संपत्ति के हलफनामे पर जिरह का पूरा अधिकार

बिलासपुर: भरण-पोषण से जुड़े मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पति और पत्नी दोनों को एक-दूसरे की आय और संपत्ति से संबंधित शपथ पत्र पर जिरह करने का पूरा अधिकार है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने दुर्ग परिवार न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक पति को अपनी पत्नी की आय से जुड़े विवरण पर सवाल करने से रोक दिया गया था। मामला रायपुर निवासी एक महिला की ओर से पति के खिलाफ दायर भरण-पोषण आवेदन से जुड़ा है।

पत्नी ने शपथ पत्र में दी थी आय-संपत्ति की जानकारी

महिला ने भरण-पोषण की मांग करते हुए अपनी आय और संपत्ति का विवरण शपथ पत्र के साथ परिवार न्यायालय में पेश किया था। इसी विवरण को लेकर पति की ओर से जिरह की जा रही थी। बीते 3 अगस्त को दुर्ग परिवार न्यायालय ने आय और संपत्ति से संबंधित जानकारी पर जिरह को रोक दिया था।

परिवार न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसका कहना था कि यदि उसे पत्नी के आय और संपत्ति संबंधी शपथ पत्र पर सवाल करने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो वह प्रभावी तरीके से अपना पक्ष नहीं रख सकेगा। पति ने इसे निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत के विपरीत बताया।

हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय को दिया निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार कर ली और दुर्ग परिवार न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 11 सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान पति को अपनी पत्नी के आय और संपत्ति संबंधी शपथ पत्र पर जिरह करने की अनुमति दी जाए।

भरण-पोषण मामलों में अहम माना जा रहा फैसला

हाईकोर्ट के इस फैसले से भरण-पोषण से जुड़े मामलों में पति-पत्नी की आय और संपत्ति की जानकारी की न्यायिक जांच के दौरान जिरह के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। अदालत ने दोनों पक्षों को एक-दूसरे के आय और संपत्ति संबंधी दावों पर सवाल रखने का अधिकार माना है।

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