
कैथल: हरियाणा के कैथल जिले के गांव सजूमा में बच्चों के बीच फैले हेपेटाइटिस-ए संक्रमण के मामले में राहत भरी खबर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 36 सैंपलों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है और कोई नया संक्रमित मरीज नहीं मिला। हालांकि जांच के दौरान गांव में पेयजल व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खामियां भी सामने आई हैं।
जन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि गांव में लोगों ने अपने स्तर पर 50 से अधिक असुरक्षित पेयजल कनेक्शन लगा रखे थे। विभाग के मुताबिक इन कनेक्शनों में तकनीकी खामियां थीं, जिससे सीवरेज और बारिश का दूषित पानी पाइपलाइन में रिस गया और संक्रमण फैलने की आशंका बनी।
जांच में मिले दर्जनों असुरक्षित कनेक्शन
विभाग ने गांव के सभी विशेष कनेक्शनों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही दोबारा पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार कई घरों और पशु बाड़ों तक लोगों ने स्वयं पाइपलाइन बिछाई थी, जिनमें निम्न गुणवत्ता की पाइपों का उपयोग किया गया था। कई स्थानों पर पाइप नालियों के पास से गुजरती मिलीं और गड्ढों को भी सही तरीके से बंद नहीं किया गया था।
डोर-टू-डोर सर्वे के दौरान ऐसे कई असुरक्षित कनेक्शन चिन्हित किए गए, जिन्हें अब दुरुस्त कराया जा चुका है।
ग्रामीणों ने विभाग के दावे पर उठाए सवाल
वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि जन स्वास्थ्य विभाग अपनी कमियों को छिपाने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि गांव का एक सबमर्सिबल बोर जोहड़ के पास स्थित है, जहां गांव का गंदा पानी पहुंचता है। ग्रामीणों का दावा है कि इसी कारण जल स्रोत दूषित हुआ और संक्रमण फैला।
ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव के जलाशयों को भाखड़ा नहर के पानी से जोड़ा जाए, ताकि स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
36 सैंपल नेगेटिव, नहीं मिला नया संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संक्रमित बच्चों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। घर पर उपचार ले रहे बच्चों का स्वास्थ्य भी बेहतर है। मंगलवार को आई 36 सैंपलों की रिपोर्ट में कोई नया संक्रमित नहीं पाया गया। वहीं हल्के लक्षण वाले बच्चों और वयस्कों के नए सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है।
पानी के सैंपल भी जांच में मिले सुरक्षित
जन स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में लगातार निगरानी कर रही हैं। पेयजल आपूर्ति के विभिन्न स्थानों से लिए गए छह पानी के नमूनों की जांच में पानी पीने योग्य पाया गया है। साथ ही क्लोरीन की मात्रा भी निर्धारित मानकों के अनुरूप मिली है।
24 घंटे मेडिकल टीम और एंबुलेंस तैनात
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला ने बताया कि गांव में 24 घंटे मेडिकल टीम और एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य शिविर लगाकर मुफ्त जांच और उपचार की सुविधा दी जा रही है। शिविर में हेपेटाइटिस-ए और ई, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस, टाइफाइड तथा लिवर फंक्शन से जुड़े आवश्यक परीक्षण किए जा रहे हैं। इसके अलावा दवाइयों, ओआरएस के पैकेट और क्लोरीन की गोलियों का भी वितरण किया जा रहा है।
50 से अधिक असुरक्षित कनेक्शन मिले: विभाग
पब्लिक हेल्थ विभाग के एक्सईएन जगदीप दलाल ने बताया कि निरीक्षण के दौरान गांव में 50 से अधिक असुरक्षित पेयजल कनेक्शन मिले। इन्हें दुरुस्त करने के लिए तीन विशेष टीमें गठित की गई हैं। विभाग का दावा है कि खराब और असुरक्षित कनेक्शनों को ठीक कर दिया गया है और फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।



