उत्तराखंड : उत्तराखंड में हैट्रिक के लिए भाजपा की नई रणनीति, हारी 23 सीटों पर जीत का प्लान; मोदी मॉडल पर रहेगा फोकस उत्तराखंड में हैट्रिक के लिए भाजपा की नई रणनीति, हारी 23 सीटों पर जीत का प्लान; मोदी मॉडल पर रहेगा फोकस उत्तराखंड में हैट्रिक के लिए भाजपा की नई रणनीति, हारी 23 सीटों पर जीत का प्लान; मोदी मॉडल पर रहेगा फोकसउत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा ने चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसके लिए राष्ट्रवाद, विकास के मोदी मॉडल और डबल इंजन धामी सरकार के कामकाज को रणनीति का प्रमुख आधार बनाया है। साथ ही 2022 के विधानसभा चुनाव में हारी सीटों पर विशेष फोकस करते हुए वहां संगठन को मजबूत करने की तैयारी की गई है।
भाजपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद तीसरी बार उत्तराखंड पहुंचे नितिन नवीन ने इस बार हल्द्वानी को रणनीतिक गतिविधियों के लिए चुना। रामलीला मैदान में दस अगस्त को हुए कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम को आधार बनाते हुए उन्होंने पार्टी की सियासी फील्डिंग तैयार की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा चुनावी रणनीति में पार्टी की विचारधारा के साथ सामाजिक समरसता को भी अहम मुद्दा बनाएगी।
दलित बूथ अध्यक्ष के घर पहुंचकर दिया सामाजिक समरसता का संदेश
गुरुवार को नितिन नवीन अचानक मोटाहल्दू के जयपुर वीसा गांव पहुंचे और एससी वर्ग से आने वाले भाजपा बूथ अध्यक्ष राकेश कुमार आर्य के घर चाय पी। इस दौरान उन्होंने एक साथ दो राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। एक तरफ एससी वर्ग के बीच पहुंचकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर यह संकेत दिया गया कि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को भी समान महत्व देता है।
नितिन नवीन बेरीपड़ाव स्थित प्रसिद्ध अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। वापसी के दौरान उनका काफिला जयपुर वीसा गांव की ओर मुड़ गया और वे भाजपा बूथ अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधान राकेश कुमार आर्य के घर पहुंचे। नवीन के अचानक घर पहुंचने से राकेश और उनके परिजन हैरान रह गए।
इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट, मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और पूर्व विधायक नवीन दुम्का समेत अन्य नेता भी मौजूद रहे। नितिन नवीन ने राकेश के परिजनों से मुलाकात की, उनके साथ फोटो खिंचवाई और घर पर चाय पी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद शुद्धीकरण का मुद्दा चर्चा में रहा है। ऐसे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का एक दलित बूथ अध्यक्ष के घर पहुंचकर चाय पीना राजनीतिक रूप से खासा अहम माना जा रहा है।
हारी 23 सीटों पर भाजपा का खास फोकस
भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव में उन सीटों पर विशेष रणनीति तैयार की है, जहां पार्टी को 2022 में हार का सामना करना पड़ा था। राज्य की 70 विधानसभा सीटों में बहुमत के लिए 36 सीटों की जरूरत है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे चार जिलों में ही कुल 36 सीटें हैं। इन जिलों में फिलहाल भाजपा के पास 21 सीटें हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सभी सांसदों और मंत्रियों को इन जिलों की 15 सीटों समेत प्रदेशभर की सभी 23 हारी हुई सीटों की जिम्मेदारी दी गई है। नेताओं को इन क्षेत्रों में रात्रिप्रवास करने, संगठन को मजबूत करने और समाज के सभी वर्गों के बीच जाकर संपर्क बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
मोदी मॉडल और डबल इंजन सरकार रहेगा चुनावी आधार
नितिन नवीन की रणनीति में विकास के मोदी मॉडल को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। भाजपा डबल इंजन सरकार के जरिए उत्तराखंड में हुए विकास कार्यों और केंद्र-राज्य के तालमेल से मिले लाभ को जनता के बीच प्रमुखता से रखने की तैयारी में है।
पार्टी यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड का संबंध केवल सरकार बनाने की राजनीति तक सीमित नहीं है। भाजपा के मुताबिक देवभूमि उत्तराखंड उसके वैचारिक आधार और पूरे नेतृत्व के लिए ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
2027 के चुनावी अभियान में वंदेमातरम, एसआईआर और तुष्टिकरण के विरोध जैसे मुद्दों को भी भाजपा के प्रमुख राजनीतिक हथियारों में शामिल किए जाने की तैयारी है।
कांग्रेस पर भाजपा का हमला
नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे और उनकी रणनीति को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश प्रवक्ता सुरेश तिवारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी उत्तराखंड में हाशिए पर खड़ी है।
उन्होंने कहा कि चार साल से अधिक समय तक कांग्रेस नेताओं को जनता की याद नहीं आई, लेकिन चुनाव नजदीक आते ही वे सक्रिय होने लगे हैं। भाजपा अब संगठन को मजबूत करने के साथ हारी हुई सीटों पर लगातार सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है।




