दस्तक-विशेष

    तेवर और जरूरत के अनुरूप हो, स्वदेशी आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर: के एन गोविंदाचार्य

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: इस बीच आत्मनिर्भरता शब्द उभरा है। शब्द दोहराने से ज्यादा महत्वपूर्ण है अर्थ को जीना। अर्थ को…

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    दो शहरों वाला देश

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : पिछले पॉच दिनों की भारी अशांति ने कोरोना से पहले से कराह रहे अमेरिका को हिलाकर…

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    कोरोना के बारे में कुछ चिंतनीय पहलु: के.एन गोविंदाचार्य

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: आजकल कोरोना के जन्मस्थान को लेकर भारी विवाद है। रूस, चीन, अमेरिका के ऊपर उँगलियाँ उठ रही है।…

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    अभी न जाओ छोड़कर

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : सरकार ने एक साथ एक ही सांस में दो घोषणाएं की हैं। उसने कहा है…

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    ये जो पॉलिटिक्स है

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: जो कभी भी कुछ भी करा दे, उसे पॅालिटिक्स कहते हैं। पूरी दुनिया के अच्छे-अच्छे, जाने-माने…

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    शब्दों को बार-बार दोहराना एक बात है, शब्द के अर्थ को जीने की बात ही कुछ और है

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: हमारे अभिभावक आदरणीय यशवंत राव केलकर जी “नानी तीन बार हँसी” आख्यान सुनाते थे। बात गहरी थी। उस…

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    छुट भईया नेता या समाजसेवी कैसे बने?

    डॉ.धीरज फुलमती सिंह व्यंग मुबंई: छुट भईया नेता और समाज सेवक इंसानो की यह वह नश्ल है,जो हर गली,नुक्कड,चौराहे पर…

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    अजीत जोगी-बहुत कठिन है उन-सा होना

    प्रो.संजय द्विवेदी भोपाल : जिद, जिजीविषा, जीवटता और जीवंतता एक साथ किसी एक आदमी में देखनी हो तो आपको अजीत…

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    हिन्दी पत्रकारिता के उस पार

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : हिन्दी पत्रकारिता के अंग्रेजीकरण ने अब कई नए आयाम खोज निकाले हैं। हिन्दी हेडलाइन्स के…

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    आदमी, आदमी हुआ तो इसलिए

    जय प्रकाश मानस ख्यात लेखक, जनसत्ता के संपादक प्रभाष जोशी जी का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि बस्स, वे कहते…

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    पसीने की कहानी

    जय प्रकाश मानस प्रिय दोस्त की प्रिय लघुकथा एक बहुत अमीर आदमी था। उसके पास बहुत बड़ा महल था। देशी-विदेशी…

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    चीटियों को पसंद नहीं ऊँची आवाज़

    जय प्रकाश मानस माटी की सिपाही हैं चींटियाँ। गुड़, गोरस या मिठाई, जो भी अतिरिक्त हों, एक दिन सब चट…

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    बड़ा बेटा

    अजीत सिंह स्वयं के जीवन से जुड़ा मार्मिक संस्मरण स्तम्भ: बड़ी घबराहट हो रही है, मन बडा बेचैन है, चक्कर…

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    राहत पैकेज का झुनझुना

    डॉ. धीरज फुलमती सिंह मुम्बई: मै तो तुम्हारे लिए चाँद तारे तोड लाऊगा। अधिकतर आशिक, अपनी माशुका को ऐसा कह…

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    महात्मा गांधी की दृष्टि में स्वातंत्र्यवीर सावरकर

    वीर सावरकर जयंती प्रसंग लोकेन्द्र सिंह भोपाल : “सावरकर बंधुओं की प्रतिभा का उपयोग जन-कल्याण के लिए होना चाहिए। अगर…

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    गोयल की रेल कहीं छूट न जाय

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: मोदी है तो मुमकिन है, कहते हैं उनके समर्थक। पर अब लोग यह भी कहने लगे…

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    बीस अब तुम इक्कीस तक इंतजार करो

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: अब से कोई 23 साल पहले आजादी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर संसद के दोनों…

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    लक्ष्य सिद्धि के लिये बुद्धि की तुलना में संवेदनशील मन का विशेष महत्व है

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के अभिभावकों में से एक आदरणीय यशवन्तराव केलकर जी के घर अनौपचारिक चायपान…

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    बड़ी मेहरबानी, करम

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: दो महीने के लॉकडाउन ने कई कमाल किए हैं और जिन कुछ लोगों को घर में…

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    ए गाँव के लफंगे-लतख़ोर…

    सुमन सिंह स्तम्भ: “हरे ये पिंटुआ! हमनियों के देबे पेप्सिया की कुल ओहि लड़िकवन में बाँट देबे…आँय।” होठों को अजब…

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    भारत राजसत्ता से संचालित समाज नहीं है

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: भारत यूरोप की तरह शर्तों पर आधारित (SOCIAL CONTRACT THEORY) समाज नही है। भारत संबंधो, पारिवारिक भावना…

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    यहां तो हर शख्स मुँह छुपाए है

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: लॉकडाउन का चौथा अध्याय अब खत्म होने को एक हफ्ता बचा है। अबकी बार लग रहा…

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    मजदूर ही क्यों, आप क्यों नहीं

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: दिल खुश करने वाली एक तस्वीर आज अखबारों में छपी। वायुसेना के हैलीकाप्टर के केबिन में…

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    हिंदी फिल्मों में हिंदी भाषा का कंफ्यूजन

    मनीष ओझा निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा…

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    गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबों

    प्रसंगवश जातिवादः उत्तर प्रदेश के एक साहित्यकार-अधिकारी सूचना निदेशक के रूप में बिहार के दौरे पर गए। वहाॅ मुख्यमंत्री से…

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    एक शपथ मेरी भी…

    पूनम चंद्रवंशी नई दिल्ली: अब मैं आपको क्या बता सकती हूँ? बहुत खूबसूरत शब्दों में और अपने दिल से सभी…

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    प्रवासी मजदूरों के प्रति सभी स्तरों पर संवेदनशील रवैया जरुरी: के.एन गोविंदाचार्य

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: 45 करोड़ मे से 40 करोड़ प्रदेशों के भीतर और कम से कम 5 करोड़ देश से…

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    रक्त प्लाज्मा थेरेपी की खोज, कोविड-19 का उपचार!

    प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम नई दिल्ली: सर्वविदित है कि करोना काल का दौर विपत्ति का दौर है। यह तब और कठिन…

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