दस्तक-विशेष

    उपनिवेशवाद दो ढाई सौ वर्षों का संक्षिप्त विवरण 

    के.एन. गोविन्दाचार्य भाग 2 इसी सिलसिले में 1780 से 1802 तक चले Land Resettlement Act और 1860-1890 में जनगणना मे…

    Read More »

    उपनिवेशवाद : दो ढाई सौ वर्षों का संक्षिप्त विवरण

    भाग 1 के.एन. गोविन्दाचार्य उपनिवेशवाद परिणामतः साम्राज्यवाद की कहानी पिछले लगभग 500 वर्षों की है। 1490 से 1500 के बीच…

    Read More »

    कृषि उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य अध्यादेश 2020

    कन्हैया पांडे अब किसान अपनी पसंद की जगह बेचेगा अपना उत्पाद नई दिल्ली: कहते हैं असली भारत गांवों में बसता…

    Read More »

    उपनिवेशवाद का इतिहास-कुछ पहलू

    के.एन. गोविन्दाचार्य विश्व में ई. 1500 से प्रारंभ हुए उपनिवेशवाद की अमानुषिकता के लक्षण थे : लूट, हथियारवाद, शोषण, अत्याचार,…

    Read More »

    खाद्य सुरक्षा दिवस मनुष्य के आधारभूत अधिकार का जागरण

    प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम नई दिल्ली: मनुष्य की तीन आधारभूत आवश्यकताएँ होती हैं-रोटी, कपड़ा और मकान। रोटी उसकी प्राथमिक आवश्यकता है।…

    Read More »

    मास्क लगाये लेकिन समझदारी भी बरतें

    डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: बुधवार 27 मई को सुबह से एक बडे अस्पताल जाना हुआ। उस अस्पताल में कोरोना मरीजों…

    Read More »

    स्वदेशी, आत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक भारतीय पृष्ठभूमि

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: पिछले दो, ढाई सौ वर्ष पहले भी भारत दुनिया मे आर्थिक दृष्टि से सबसे धनी समाज रहा…

    Read More »

    जवाबदेही की मांग करता अनलॉक

    अहमद रज़ा नई दिल्ली: लॉकडाउन के चार फेज़ के बाद अब भारत अनलॉक की तरफ बढ़ रहा है। वर्तमान नियमों…

    Read More »

    जब गंगा-जमुना में उठ रही कर्तव्य और रिश्ते के बीच की भंवर में फंसे दिलीप कुमार और उनके सगे भाई नासिर ख़ान

    मनीष ओझा दिल रोता है चेहरा हँसता रहता हैकैसा कैसा फ़र्ज़ निभाना होता है।। मुबंई: अख्तर आज़ाद की ये शायरी…

    Read More »

    लॉकडाउन पर दोहरी मार

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : जिन लोगों ने यह मान रखा था कि लाॅकडाउन थोड़े समय का कैदखाना है, वे उसकी…

    Read More »

    पर्यावरण परिवर्तन का जैव विविधता पर असर: प्रो.भरत राज सिंह

    वरिष्ठ पर्यावरणविद प्रो. भरत राज विश्व पर्यावरण दिवस-2020 पर विशेष (उमेश यादव/राम सरन मौर्या): प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण…

    Read More »

    इंसानी बस्ती केवल इंसानों की???

    विनय सिंह स्तम्भ: आज केरल में एक बड़ी संवेदनहीन घटना घटित हुई। केरल के कुछ स्थानीय लोगो ने एक गर्भवती…

    Read More »

    तेवर और जरूरत के अनुरूप हो, स्वदेशी आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर: के एन गोविंदाचार्य

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: इस बीच आत्मनिर्भरता शब्द उभरा है। शब्द दोहराने से ज्यादा महत्वपूर्ण है अर्थ को जीना। अर्थ को…

    Read More »

    दो शहरों वाला देश

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : पिछले पॉच दिनों की भारी अशांति ने कोरोना से पहले से कराह रहे अमेरिका को हिलाकर…

    Read More »

    कोरोना के बारे में कुछ चिंतनीय पहलु: के.एन गोविंदाचार्य

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: आजकल कोरोना के जन्मस्थान को लेकर भारी विवाद है। रूस, चीन, अमेरिका के ऊपर उँगलियाँ उठ रही है।…

    Read More »

    अभी न जाओ छोड़कर

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : सरकार ने एक साथ एक ही सांस में दो घोषणाएं की हैं। उसने कहा है…

    Read More »

    ये जो पॉलिटिक्स है

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: जो कभी भी कुछ भी करा दे, उसे पॅालिटिक्स कहते हैं। पूरी दुनिया के अच्छे-अच्छे, जाने-माने…

    Read More »

    शब्दों को बार-बार दोहराना एक बात है, शब्द के अर्थ को जीने की बात ही कुछ और है

    के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: हमारे अभिभावक आदरणीय यशवंत राव केलकर जी “नानी तीन बार हँसी” आख्यान सुनाते थे। बात गहरी थी। उस…

    Read More »

    छुट भईया नेता या समाजसेवी कैसे बने?

    डॉ.धीरज फुलमती सिंह व्यंग मुबंई: छुट भईया नेता और समाज सेवक इंसानो की यह वह नश्ल है,जो हर गली,नुक्कड,चौराहे पर…

    Read More »

    अजीत जोगी-बहुत कठिन है उन-सा होना

    प्रो.संजय द्विवेदी भोपाल : जिद, जिजीविषा, जीवटता और जीवंतता एक साथ किसी एक आदमी में देखनी हो तो आपको अजीत…

    Read More »

    हिन्दी पत्रकारिता के उस पार

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : हिन्दी पत्रकारिता के अंग्रेजीकरण ने अब कई नए आयाम खोज निकाले हैं। हिन्दी हेडलाइन्स के…

    Read More »

    आदमी, आदमी हुआ तो इसलिए

    जय प्रकाश मानस ख्यात लेखक, जनसत्ता के संपादक प्रभाष जोशी जी का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि बस्स, वे कहते…

    Read More »

    पसीने की कहानी

    जय प्रकाश मानस प्रिय दोस्त की प्रिय लघुकथा एक बहुत अमीर आदमी था। उसके पास बहुत बड़ा महल था। देशी-विदेशी…

    Read More »

    चीटियों को पसंद नहीं ऊँची आवाज़

    जय प्रकाश मानस माटी की सिपाही हैं चींटियाँ। गुड़, गोरस या मिठाई, जो भी अतिरिक्त हों, एक दिन सब चट…

    Read More »

    बड़ा बेटा

    अजीत सिंह स्वयं के जीवन से जुड़ा मार्मिक संस्मरण स्तम्भ: बड़ी घबराहट हो रही है, मन बडा बेचैन है, चक्कर…

    Read More »

    राहत पैकेज का झुनझुना

    डॉ. धीरज फुलमती सिंह मुम्बई: मै तो तुम्हारे लिए चाँद तारे तोड लाऊगा। अधिकतर आशिक, अपनी माशुका को ऐसा कह…

    Read More »

    महात्मा गांधी की दृष्टि में स्वातंत्र्यवीर सावरकर

    वीर सावरकर जयंती प्रसंग लोकेन्द्र सिंह भोपाल : “सावरकर बंधुओं की प्रतिभा का उपयोग जन-कल्याण के लिए होना चाहिए। अगर…

    Read More »

    गोयल की रेल कहीं छूट न जाय

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: मोदी है तो मुमकिन है, कहते हैं उनके समर्थक। पर अब लोग यह भी कहने लगे…

    Read More »
    Back to top button