दस्तक-विशेष

    बात बसों की ही तो है बस

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: करीब दो महीने के कर्णभेदी मौन के बाद राजनीतिक खिलाड़ी अपने चिरपरिचित खेल पर वापस लौट…

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    देश के लिए मिसाल हैं ये प्रशासनिक अधिकारी

    सुधांशु दिवेदी लखनऊ: यूँ तो तो साक्षात्कार और भेंटवार्ताओं में लोग यही बताते हैं कि वे समाज परिवर्तन और सेवा…

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    प्रवासियों ग़ैरत मंद बनो

    डा़. धीरज फुलमती सिंह मुम्बई: हिदुस्तान को आज़ाद हुए 70 साल से ज्यादा हो गये है। इस दौरान भारत के…

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    लाचार गरीबों पर सियासत

    अशोक पाण्डेय लखनऊ: पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश में सियासी नौटंकी चल रही है। प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक…

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    तुम्ही से दिल का हाल छुपाएँ, तुम्ही को हाल बताएं

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: घूस यानी रिश्वत से हमारी बहुत पुरानी जान पहचान है। हमें इससे नफरत तो है लेकिन…

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    घर में जो रहोगे काम बन जाएगा

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: एक और लाॅकडाउन जल्दी ही दस्तक दे सकता है और यह नए किस्म का लाॅकडाउन होगा…

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    प्रवासी मजदूर: देश की कमजोरी या देश की ताकत?

    के. एन. गोविंदाचार्य स्तम्भ: “जंजीर की मजबूती उसकी मजबूत कड़ियों से नहीं बल्कि उसकी सबसे कमजोर कड़ी से ही आंकी…

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    ट्वीट, वीडियो सब हो गया, अब लाओ सूची…?

    बसों पर राजनीति में उलझी कांग्रेस, अपने ही दांव से चित हुई लखनऊ (अमरेन्द्र प्रताप सिंह): प्रवासी मजदूरों को लेकर…

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    ‘देशप्रेम की साकार और व्यावहारिक अभिव्यक्ति है स्वदेशी’

    लोकेन्द्र सिंह भोपाल : मुझे आज तक एक बात समझ नहीं आई कि कुछ लोगों को स्वदेशी जैसे अनुकरणीय, उदात्त…

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    संकट में है पत्रकारिता की पवित्रता

    प्रो.संजय द्विवदी कसौटी पर है मीडिया की नैतिकता और समझदारी भोपाल : भारतीय मीडिया अपने पारंपरिक अधिष्ठान में भले ही…

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    देश के दुखों की नदी में तैरते सवाल

    प्रो. संजय द्विवेदी कोरोना के बहाने आइए अपने असल संकटों पर विचार करें भोपाल : कोरोना संकट के बहाने भारत…

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    अनिल दवे : परम्परा के पथ का आधुनिक नायक

    संजय द्विवेदी अनिल माधव दवे की पुण्यतिथि पर विशेष भोपाल : पर्यावरण, जल, जीवन और जंगल के सवाल भी किसी…

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    आत्मनिर्भर अभियान के तहत 20 लाख करोड़ में से 40 हजार करोड मनरेगा को आवंटित

    कन्हैया पांडे सरकार की पांचवें दौर की घोषणाएं नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड़-19 महामारी से लड़ने के लिए…

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    ” कैसी हो यह ईद? “

    अहमद रज़ा स्तम्भ: कुछ ही दिनों में ईद का त्यौहार आने वाला है। ऐसे में कोरोना को लेकर सरकार और…

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    उच्च रक्तचाप दुनिया भर में मृत्यु की एक बड़ी वजह: डॉ. अनुरुद्ध वर्मा

    विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर विशेष (उमेश यादव/राम सरन मौर्या): विश्व उच्च रक्तचाप दिवस डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रतिवर्ष 17 मई को…

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    “श्रीकृष्ण की पावन नगरी मथुरा में श्रीराम चर्चा का वो अनूठा और मार्मिक प्रसंग”

    राम महेश मिश्र बात बीती शताब्दी के आख़िरी दशक की है। साल रहा होगा कोई 1991/92 का। हम सपत्नीक कृष्णनगरी…

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    चार्ली चैपलिन भी थे वी.शांताराम के प्रशंसक

    विमल अनुराग भारत की पहली द्विभाषिक फिल्म और पहली रंगीन फिल्म के लिए प्रयास करने वाले नवाचारी निर्देशक वी.शांताराम की…

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    अथश्री मजदूर कथा: संवेदनशील सीएम के संवेदनहीन अफसर

    योगी कर रहे ‘जागरूक कर रोकने के निर्देश’ जारी और सीमा में ‘घुसने पर प्रतिबन्ध’ लगा रहे ‘तिवारी’ मुख्यमंत्री का…

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    तुम्हें बुरी सांस से बचाए भगवान!

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: माताएं एक जमाने से अपने लाडलों को बुरी नजर से बचाने के लिए माथे पर काला…

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    स्वदेशी की दिशा में बढ़ने का आज का तकाजा

    के. एन. गोविंदाचार्य स्तम्भ: प्रवासी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के स्वरोजगारियों की घर-वापसी की अंतहीन व्यथा-कथा, उनका मौन विलाप पिछले…

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    के.एल. सहगल से बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए जैसे गीत गवाने वाले फिल्म निर्माता “फनी मजूमदार”

    विमल अनुराग पुण्यतिथि पर विशेष भारतीय सिनेमाई जगत की गरिमा और महिमा को सम्मान देने वाले लोग आज फिल्म निर्माता…

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    बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी बिना पिये ही बन गए ‘जॉनी वॉकर’

    मनीष ओझा “ज़मीर कांप तो जाता है कुछ भी कहिये वो हो गुनाह के पहले या गुनाह के बाद।।” स्तम्भ:…

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    बूढ़ों की रक्षा की खातिर

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: अपने देश में कई पश्चिमी देशों की तुलना में कम बूढ़े हैं तो भी उनकी खातिरदारी…

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    उत्तर प्रदेश में भत्ते खत्म होने से 16 लाख कर्मचारी नाराज

    लखनऊ (संजय सक्सेना) : कोरोना महामारी के समय आर्थिक तंगी से जूझ रही योगी सरकार एक तरफ जरूरतमंदों का पेट…

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    अभिनेत्री से नर्सिंग ऑफिसर बनी शिखा मल्होत्रा

    उमेश यादव/राम सरन मौर्या: जब पेशेवर चिकित्सक का साथ निभाने की बात आती है तब रोगियों की 24 घन्टे देखभाल…

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    लॉकडाउन के हमारे गुमनाम नायक

    डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुम्बई: भारत मे लॉक डाउन हुए 50 दिन पूरे हो चुके हैं। हम सब जानते हैं कि…

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    पैकेज के पार खड़े मजदूर

    ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: कहा जाता है कि मुसीबत अकेले नहीं आती। कई विपत्तियाॅ साथ में लेकर आती है। तमाम…

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    इस्लामोफोबिया के मूल में क्या है ?

    सुधांशु दिवेदी स्तम्भ:  इस्लामोफोबिया का यह दौर नया है पर इसका इतिहास नया नहीं है। इसका इतिहास हज़ार साल पुराना…

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