दस्तक-विशेष

    वैचारिक संघर्ष नहीं, केरल में है लाल आतंक

    राजेश के शरीर पर 83 घाव बताते हैं कि केरल में किस तरह हावी है लाल आतंक केरल पूरी तरह से…

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    उत्कृष्ट जीवन मूल्य ही नहीं, मनुष्य की स्वाभाविक प्यास भी है स्वतंत्रता

    सजग होकर ही उड़ना हमेशा होता है आनंददायी  मनुष्य स्वेच्छा से जन्म नहीं लेता। मनुष्य का जन्म तमाम ज्ञात और…

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    पटेल जीते, लेकिन कांग्रेस हार गई!

    -सुरेश हिन्दुस्थानी देश में लगातार सिमटते जा रहे सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस की स्थिति एक डूबता हुआ जहाज की…

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    असहिष्णुता की बहस के बीच केरल की राजनीतिक हत्याएं

    केरल में आए दिन हो रही राजनीतिक हत्याओं से एक सवाल उठना लाजिमी है कि भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में…

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    पत्रकारिता में भी ‘राष्ट्र सबसे पहले’ जरूरी

    मौजूदा दौर में समाचार माध्यमों की वैचारिक धाराएं स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। देश के इतिहास में यह पहली बार…

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    कौन होगा नया भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष!

    अब तक जो भी नाम सामने आए उनमें श्याम जाजू ही सबसे मुफीद भाजपा में एक बार फिर से राष्ट्रीय…

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    नाईक की मुस्कान में बच्चों जैसा उल्लास

    ज्ञान प्राप्ति कठिन नहीं लेकिन जाने हुए को कर्म में लागू करना श्रम साध्य है। प्रकृति का अणु परमाणु गतिशील…

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    यह भूल मत जाना कि ‘दलित’ हो तुम

    यों तो कांग्रेस द्वारा शुरू की गयी कई योजनाओ को भाजपा भी ज्यों का त्यों या थोड़े परिवर्तन के साथ…

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    चट तलाक –पट ब्याह

    अबकी बार तो मुझे पक्का भरोसा है , निशा मौसी का नाम जरूर गिनीज बुक में दर्ज होगा . शाम…

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    ओलम्पिक में रेलवे खिलाड़ियों को मेडल जिताने का सपना

    -डीएन वर्मा होनहार बिरवान के होत चिकने पात- कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिखाई पड़ जाते…

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    गोपी पूरा कर रहे हैं डॉ. अखिलेश दास का सपना

    डॉ. अखिलेश दास के आकस्मिक निधन के बाद पूरा बैडमिंटन जगत सदमे में था। दरअसल बैडमिंटन को बड़े स्तर पर…

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    अथाह सागर और हम!

    एक नौका विस्तृत सागर में यूँ स्वयं को लहरों के हवाले कर देती है जैसे कोई अपने किसी परम मित्र…

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    ‘रेस्क्यू-ऑपरेशन’

    -सुबह बिस्तर छोड़ते के उपरान्त, अमूमन जैसी कि दिनचर्या है, दैनन्दिन की क्रिया-प्रक्रिया से पहले मेरी आदत है, कम-अज-कम दो…

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    आपातकाल : आगे की कथा

    आपातकाल। स्वातंत्र्योत्तर भारतीय इतिहास का संक्रमण काल। एक निरंकुश सत्तालोलुप शासक द्वारा लोकतंत्र पर कुठाराघात और अधिनायकवादी व्यवस्था थोपने का…

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    प्रवासी ही नहीं पराया साहित्यकार की भी संज्ञा देते हैं…

    परदेस में राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में जुटे सरन घई जी के व्यक्तित्व को यदि हम सामान्य रूप से निरखें-परखें…

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    5800 वर्ग किमी क्षेत्रफल के आइसबर्ग के दक्षिणी ध्रुव से टूटने से बढ़ा खतरा

    दो वर्ष पूर्व प्रो. भरतराज सिंह ने अपनी पुस्तक में जताई थी इसकी आशंका यदि पूरी पिघल गयी चट्टान की…

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    ‘विश्पाद गुधौलिया’

    आशुतोष राणा की कलम से… उन्होंने अपने खेत पर अंगद का मंदिर बनाया हुआ था। ये पूरे संसार में एक…

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    अमेरिका के लिए भारत बना ‘प्रथम’

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया के समक्ष दिए गये वक्तव्य में स्वयं स्वीकार किया कि ट्रंप से उनकी बातचीत हर…

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    सरकार के सौ दिन पर अपनी-अपनी सियासत

    मुख्यमंत्री सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर गढ़ी कैन्ट स्थित टपकेश्वर महादेव मन्दिर प्रांगण तथा टोंस (तमसा)…

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    उत्तर प्रदेश में दलित वोट के लिये दे दनादन

    यूपी की राजनीति में बसपा का उदय ही दलित हितों के नाम पर हुआ था। चुनाव के समय हमेशा ही…

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    योगी हठ के सामने छोटा पड़ा चुनौतियों का पहाड़

    ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मोदी फार्मूले पर ही योगी आगे बढ़ रहे हैं। अब योगी की भाषा में बेबाकी…

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    मिनीमम गवर्नमेंट और मैक्सीमम गवर्नेंस के वादे का असली सच

    जनधन से जुड़े पूरे घटनाक्रम से गुजर जाने के बाद सरकार ने घोषणा की है कि बैंक में बिना आधार…

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    क्यों गुस्से में है देश का अन्नदाता?

    मध्यप्रदेश के किसान कई हफ्तों से फसल के अच्छे दाम और राज्य सरकार के कर्ज माफी की मांग कर रहे…

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    इन गुणोत्तर करों के बीच अधिकार भी हों

    एक आम नागरिक की अभिव्यक्ति कुछ इस प्रकार होती है-एक वेतन से कितने और कितनी बार टैक्स। आम जरूरत की…

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    चीख, कुतर्क, झूठ और खिंचे हुए पाले

    जब फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल साइटें नहीं थीं क्या तब भी सामयिक और ज्वलंत मुद्दों पर अपनी भिन्न-भिन्न राय रखने…

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    कहां गया विरोध पक्ष?

    मोदी का सबसे बड़ा टॉनिक खुद राहुल गांधी ही हैं। जब तक मुख्य विरोधी की भूमिका में राहुल हैं, मोदी…

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    राष्ट्रपति चुनाव के बहाने एक बड़ी छलांग

    उत्तर प्रदेश के लोग इस बात से जरूर खुश हो सकते हैं जबकि कोविंद जी का चुना जाना लगभग तय…

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    अपने, सबके और राष्ट्र के रामनाथ कोविंद

    रामनाथ कोविंद ध्येयनिष्ठ समाजसेवी हैं। सबके प्रति आत्मीय। सहज मिलनसार। अपरिचित के लिए भी सुपरिचित से ज्यादा आत्मीय। अतिसंवेदनशील प्रामाणिक…

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