स्तम्भ
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छोटे पड़ते कानून के हाथ
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: दो सितम्बर 2013 को धर्मगुरु आसाराम बापू बलात्कार के एक मामले में जेल भेजे गए थे।…
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काफी पुराना है टिड्डीदल की विनाशलीलाओं का इतिहास
अमरेंद्र प्रताप सिंह वरिष्ठ पत्रकार विश्व के साठ देश बन चुके हैं शिकार, एक झुंड में होती हैं चार से…
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डिजिटलीकरण का नवीनीकरण और अध्यापक
सर्वेश कुमार मौर्य स्तम्भ: दलित साहित्य के नामी लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि अपनी आत्मकथा -जूठन में अध्यापकों से जुड़े एक प्रसंग…
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वसई-विरार के घमंडी कमिश्नर, पद महान-किर्ती लहान!
डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: वसई-विरार के नवनियुक्त आयुक्त गंगाधरन डी पद ग्रहण करते ही अपनी कार्यशैली के कारण सुर्खियों में…
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2010-2020 का विवरण और आगे की बात
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग 2 विचारहीन वैश्वीकरण के परिणाम देश के लिये हितकर नही हुए। आर्थिक दृष्टि से ग्राम उजड़े। बूढ़े,…
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2010 के बाद क्या हुआ
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग 1 1995 से लेकर 2010 के 15 वर्षों में यूरोप और अमेरिका ने मिलकर WTO और उससे…
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भारत में है नेपाल की समस्याओं का रामबाण इलाज
विवेक ओझा नई दिल्ली: नेपाल के हालिया घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि राजनीति सद्बुद्धि और दुर्बद्धी दोनों से ही रोचक,…
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आया राम गया राम एक बार फिर से
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश चुनाव में प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए वोट दिया। चुनाव के जो…
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बहुत घातक है जातिवाद का जहर घोलने की सियासत
राघवेन्द्र प्रताप सिंह एक दुर्दांत हत्यारे के एनकाउंटर को जातिवाद के चश्में से देखने वालों को शर्म आनी चाहिए भारतीय…
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उत्तर-कोरोना काल में स्कूली शिक्षा की चुनौतियाँ
सर्वेश कुमार मौर्य आज हम जिस दौर में हैं, वह चुनौतियों से भरा दौर है। कोरोना वायरस ने हमारे समय,…
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हिंदी का दर्द चीन्हें!
के. विक्रम राव स्तम्भ: जरूरत है अब कि अकादमिक क्षेत्र के साथ स्कूली स्तर पर सुधार के कदम उठाये जाएँ।…
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भारत के 1980-95 तक की राजनीति की एक झलक
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग-4 सन् 89 के चुनाव मे कांग्रेस हारी। बोफोर्स का मुद्दा वैसा ही बना रहा। दुर्भाग्य से 1991…
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भारतीय पुलिस, लोकतंत्र और सिविल सोसाइटी
सर्वेश कुमार मौर्य स्तम्भ: हाल के दिनों में पुलिस दमन-उत्पीड़न की बढ़ती हुई घटनाओं के चलते मन में कई सवाल…
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भारत के 1980-95 तक की राजनीति की एक झलक
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग -2 सन् 80 मे श्रीमती इंदिरा गांधी के सत्तासीन होने और श्री संजय गांधी की असामयिक मृत्यु…
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भारत के 1980-95 तक की राजनीति की एक झलक
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग -1 स्तम्भ: भारत में और दुनिया में भी इस कालखंड में बाहुबल, सैन्यबल, हथियारवाद का प्रभाव बढ़ा।…
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पुुलिसिया चेहरे पर गुलाबी रंग
प्रसंगवश ज्ञानेन्द्र शर्मा स्तम्भ : ऐसे बहुत कम अवसर आते हैं जब पुलिस आम आदमी को दोस्त नजर आती है।…
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भारत की राजनैतिक स्थिति पर एक नजरियाँ
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग -1 भारत की राजनीति को एक और ढंग से कालखंडों में बाँटकर देखा जा सकता है। उसका…
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विकास दुबे का मारा जाना जरूरी था!
डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: विकास दुबे को गिरफ्तार करके सड़क के रास्ते कानपुर लाया जा रहा था, रास्ते में उसकी…
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अंग्रेजों के भारत से चले जाने के बाद राजनीतिक यात्रा
के.एन. गोविन्दाचार्य 30-30 वर्षों के 3 चरणों में देखी जा सकती राजनैतिक यात्रा है1950-1980, 1980-2010, 2010-2020 और आगे 2040 तक…
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महामारी, डिजिटलीकरण और स्त्रियां
सर्वेश कुमार मौर्य बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में जब आर्थिक सुधारों की तथाकथित महान -ट्रिकिल डाउन थिअरी-आयी तो उसमें…
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तौबा-तौबा,गाँव की राजनीति से ईश्वर बचाये!
डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित चुरियां मेरा पुस्तैनी गांव है। मेरा जन्म तो यहां…
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प्रसार भारतीः सूचना व प्रसारण का सशक्त माध्यम
प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम पटना: जिस युग में हम जी रहें हैं,वह युग सूचनाओं का है। हर क्षण हम सभी सूचनाओं…
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संजीव कुमार : एक ऐसा खिलौना जिसकी कोशिश ने अभिनय को नई दस्तक दी
विमल अनुराग जयंती पर विशेष संजीव कुमार भारतीय सिनेमा का एक ऐसा नाम हैं जिसपर भारतीय सिनेमा जगत और उसके…
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सत्ता और दल की राजनीति को चाहिये कि चुनावी जीत या सरकार बनाने की करतब को सब कुछ न मान ले
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: भारतीय समाज भगवद्सत्ता से प्रेरित है। इसका संचालन, धर्मसत्ता, समाजसत्ता, राजसत्ता और अर्थसत्ता-इस अनुक्रम से होता है।…
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आईना देखकर ग़ुरूर फज़ूल, बात वो कर जो दूसरा न करे
मनीष ओझा मुज़्तर खैराबादी के इस शेर को हकीकत का अमलीजामा पहनाने वाले एक ख़ास सख्शियत की याद आ गयी।…
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डबल ‘पी’ का खतरनाक गठजोड़
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश ‘पी’ और ‘पी’ यानी पुलिस और पॉलिटिशियन के गठजोड़ ने उत्तर प्रदेश में न जाने कितने गुल…
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अमेरिका-चीन के मध्य सागरीय शक्ति प्रदर्शन की होड़
विवेक ओझा चीन ने 1 जुलाई से अगले पांच दिनों के लिए पारासेल द्वीप पर मिलिट्री ड्रिल करना शुरू किया…
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भारत का नये दशक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रवेश
प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम पटना: वर्तमान दौर संपूर्ण विश्व के लिए काफी उथल-पुथल भरा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा…
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