स्तम्भ
-
बच्चे का धर्म
सुभाष गाताडे अपनी सन्तान को क्या माता पिता के नाम जुड़ी जाति तथा धर्म की पहचान के संकेतकों से नत्थी…
Read More » -
भोजपुरी का दुख
मृत्युंजय पाण्डेय बहुत प्रसिद्ध कहावत है ‘घर को आग लगी, घर के चिराग से ही।’ आज भोजपुरी के साथ भी…
Read More » -
••राम रवा लपटा महाराज••
वे लोगों से अभिवादन में केवल राम राम कहते थे, खाने में उन्हें सिर्फ़ रवा का हलवा, और बेसन का…
Read More » -
अपना-अपना रंग
बलिहारी हो रंगों की सर्वत्र व्याप्त शून्यता से सिरजनहार अकुला उठे। अकुलाहट कौतूहल में तब्दील हो गई। कल्पना ने पहली…
Read More » -
महिला लेखन की चुनौतियां
8 मार्च अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष लेखन तो किसी के लिए भी चुनौती ही होता है चाहे वह पुरुष…
Read More » -
••• लाठी गली •••
डॉक्टर लालचंद साठी, जिनके कर्मों के कारण क़स्बे के लोग उनको डॉक्टर लाठी कहने लगे।जिस गली में वे रहते थे…
Read More » -
कब सुनिश्चित होगा बच्चों का खेलकूद अधिकार?
सुभाष गताडे शिवपुरी (मध्य प्रदेश) से आयी एक खबर को लेकर देशभर में बाल अधिकारों के लिए सक्रिय लोगों में…
Read More » -
हर कवि के पास एक बोरा प्रेम
हिन्दी को अच्छा करने का सबसे तगड़ा उपाय तो यह ही हो सकता है कि पुरस्कार ख़त्म कर दिए जाएं।…
Read More » -
फेसबुक ने बदली तो है औरत की दुनिया
सदियां बीतीं पर अभी भी इन्ही विचारधाराओं का पालक-पोषक है हमारा यह भारतीय समाज। देवी की उपासना में लीन, पुजारियों-पंडों…
Read More » -
दस्तक के दस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेषांक
अजीब विडम्बना है कि दस्तक तो हाथों से दी जाती है, लेकिन पूजे पांव जाते हैं। दस्तक तो हुजू़र एक…
Read More » -
अपनी चोटी में बांध लो दुनिया
नवम्बर से सरकारी स्कूलों में मुफ्त सेनेटरी नैपकिन बांटने के लिए शासन ने बीस करोड़ रुपये जारी कर बीएसए व…
Read More »