छत्तीसगढ़राज्य

CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व CM भूपेश बघेल के PA के घर समेत 7 ठिकानों पर छापेमारी

रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में कथित घोटाले और पेपर लीक मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को राज्यभर में एक साथ सात ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी की कार्रवाई में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक केके चंद्राकर का घर भी शामिल है। यह जांच वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ी है।

अधिकारियों के मुताबिक, ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय को कुछ संदिग्धों के ठिकानों से संबंधित जानकारी मिली थी। इसी आधार पर बुधवार सुबह कई स्थानों पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस की भी मदद ली जा रही है।

तमन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद बड़ी कार्रवाई

ईडी की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद हुई है। ईडी ने 25 जुलाई को कथित परीक्षा पेपर लीक से जुड़े धनशोधन मामले में सोनवानी को गिरफ्तार किया था।

ईडी अधिकारियों ने उनकी गिरफ्तारी के समय आरोप लगाया था कि पूछताछ के दौरान तमन सिंह सोनवानी कई सवालों के जवाब देने में टालमटोल कर रहे थे। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो भी इस मामले में सोनवानी को गिरफ्तार कर चुकी है।

2024 में सीबीआई ने दर्ज की थी एफआईआर

ईडी की धनशोधन जांच का आधार सीबीआई की ओर से वर्ष 2024 में दर्ज की गई एफआईआर है। सीबीआई की कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस की उस शिकायत के बाद शुरू हुई थी, जो नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन के दौरान दर्ज की गई थी।

सीबीआई ने मामले की जांच के दौरान वर्ष 2024 में तमन सिंह सोनवानी को भी गिरफ्तार किया था। अब इसी मामले से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों को लेकर ईडी की जांच आगे बढ़ रही है।

सोनवानी पर रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप

ईडी का आरोप है कि तमन सिंह सोनवानी ने कथित तौर पर गैरकानूनी लाभ के बदले परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करने में मदद की। एजेंसी के मुताबिक, इससे उनके रिश्तेदारों और कथित तौर पर रिश्वत देने वाले उम्मीदवारों को फायदा पहुंचा।

जांच एजेंसी का दावा है कि वर्ष 2021 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती के नियमों में बदलाव किया गया था। इसमें परिवार के सदस्यों की परिभाषा से ‘भतीजे’ शब्द हटा दिया गया। ईडी का आरोप है कि इस बदलाव का उद्देश्य सोनवानी के रिश्तेदारों के सरकारी पदों पर चयन का रास्ता आसान करना था।

सीएसआर के नाम पर कथित रिश्वत का आरोप

ईडी ने रिश्वत की रकम के लेन-देन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी के अनुसार, कथित रिश्वत का एक हिस्सा नकद लिया गया, जबकि बाकी रकम एक परिवार के नियंत्रण वाली समिति के माध्यम से एक कॉलेज को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व के तहत दान के रूप में दी गई। ईडी का आरोप है कि जिस कॉलेज के नाम पर यह रकम ली गई, उसका वास्तव में अस्तित्व ही नहीं था।

जांच एजेंसी के दावे के मुताबिक, एक निजी कंपनी ने उप जिलाधिकारी के पद पर दो उम्मीदवारों के चयन को कथित तौर पर प्रभावित करने के बदले इस माध्यम से करीब 45 लाख रुपये का लेन-देन किया। फिलहाल ईडी की सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

Related Articles

Back to top button