CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी: “24×7 काम करे न्यायपालिका, तभी आम आदमी को मिलेगा त्वरित न्याय”

जबलपुर: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जब न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह चौबीसों घंटे काम करने वाली प्रणाली के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि आम लोगों की पीड़ा, समस्याओं और आकांक्षाओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्रिय, तेज और तकनीक आधारित बनाना बेहद जरूरी है।
सीजेआई सूर्यकांत मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का विषय “फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन, एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन” रखा गया था। इस दौरान उन्होंने हाई कोर्ट के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ भी किया।
“तकनीक ही समय की बर्बादी रोकने का सबसे बड़ा माध्यम”
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका को आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम के जरिए और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका केवल पुराने तकनीकी ढांचे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आम नागरिकों को तेजी से न्याय दिलाने के लिए अत्याधुनिक एआई तकनीकों का इस्तेमाल करने पर भी फोकस कर रही है।
उन्होंने कहा कि अदालतों में समय की बर्बादी रोकने और मामलों के तेजी से निपटारे का सबसे प्रभावी समाधान टेक्नोलॉजी ही है।
कोविड काल का जिक्र कर गिनाईं न्यायपालिका की उपलब्धियां
सीजेआई सूर्यकांत ने कोविड-19 महामारी के दौरान न्यायपालिका की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि महामारी जैसे कठिन दौर में भी भारतीय न्यायपालिका ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाना नहीं छोड़ा।
उन्होंने कहा, “हमने अपने कोर्ट बंद नहीं किए।” तकनीक की मदद से अदालतों ने जरूरी मामलों की सुनवाई जारी रखी और संकट के समय भी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि उस दौर में भारतीय न्यायपालिका की कार्यप्रणाली की वैश्विक स्तर पर सराहना हुई थी।
पूरे देश में लागू हो सकता है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का मॉडल
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म की सराहना करते हुए सीजेआई ने कहा कि ऐसी तकनीकी व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की जरूरत है। उन्होंने केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के सुझाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मॉडल को देशभर की अदालतों में लागू किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष समिति का गठन किया है, जो न्यायिक व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल और मामलों के त्वरित निपटारे की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।



