ट्रंप प्रशासन की वीजा नीति पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को बड़ी राहत; जानें क्या था नया नियम

वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन को अमेरिका में विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए वीजा अवधि सीमित करने के मामले में संघीय अदालत से बड़ा झटका लगा है। बोस्टन के फेडरल जज एफ. डेनिस सेलॉर ने सोमवार को नए नियम के लागू होने पर रोक लगा दी। यह फैसला डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के प्रस्तावित नियम के प्रभावी होने से ठीक एक दिन पहले आया। कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल एफ, जे और आई वीजा धारकों को राहत मिल गई है।
DHS के तर्कों को कोर्ट ने बताया पर्याप्त मजबूत नहीं
जज सेलॉर ने यूनियनों और उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों के गठबंधन के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि DHS ने नियम में बदलाव के लिए जिन कारणों का हवाला दिया, वे पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं थे। विभाग ने वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नियम बदलने का आधार बताया था।
हालांकि, अदालत के मुताबिक DHS ने संभावित समस्याओं का पर्याप्त आकलन नहीं किया और उन्हें दूर करने के कम कठोर विकल्पों पर भी पर्याप्त विचार नहीं किया। पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा नियुक्त जज सेलॉर ने कहा कि नया नियम करीब पांच दशक से चली आ रही व्यवस्था को बदल देता, जिसके तहत विदेशी छात्र अपने पाठ्यक्रम की अवधि तक अमेरिका में रह सकते थे और काम कर सकते थे।
जुलाई में प्रस्तावित किए गए थे नए वीजा प्रावधान
DHS ने जुलाई में अमेरिका में विदेशी नागरिकों के रहने की अवधि तय करने वाला नया नियम प्रस्तावित किया था। इसके तहत एफ वीजा पर आने वाले विदेशी छात्रों और जे वीजा वाले सांस्कृतिक एक्सचेंज विजिटर्स के अमेरिका में रहने की अवधि अधिकतम चार साल करने का प्रावधान था।
वहीं, विदेशी पत्रकारों को मिलने वाले आई वीजा की अवधि में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया था। कई वर्षों तक वैध रहने वाले इन वीजा को अधिकतम 240 दिनों तक सीमित करने की योजना थी।
अमेरिका में 16 लाख एफ और 5 लाख जे वीजा धारक
अदालत के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार, अमेरिका में फिलहाल करीब 16 लाख लोग एफ वीजा और करीब 5 लाख लोग जे वीजा पर हैं। नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स को अपनी पढ़ाई या कार्यक्रम की अवधि के दौरान वीजा विस्तार के लिए आवेदन करना पड़ सकता था।
जज सेलॉर ने विश्वविद्यालयों पर इसके संभावित असर को भी गंभीर बताया। उनके मुताबिक, नई नीति से बड़े विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले कम हो सकते थे, जिससे संस्थानों को करोड़ों डॉलर के नुकसान की आशंका थी।
MIT और Harvard जैसे शोध विश्वविद्यालयों पर भी असर
फैसले में एमआईटी और हार्वर्ड जैसे प्रमुख शोध विश्वविद्यालयों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि इन संस्थानों में स्नातक स्तर पर बड़ी संख्या में विदेशी छात्र पढ़ते हैं। जज ने चेतावनी दी कि विदेशी छात्रों की संख्या घटने का असर केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी उच्च शिक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
अदालत के मुताबिक, विदेशी छात्रों और शोधकर्ताओं की लंबे समय से मौजूदगी ने अमेरिका में विज्ञान, चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्रों में प्रगति को बढ़ावा दिया है। ऐसे में करीब पांच दशक पुरानी व्यवस्था में बदलाव करने वाले प्रस्तावित नियम का व्यापक प्रभाव पड़ सकता था।
फिलहाल कोर्ट की रोक के बाद ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित वीजा नीति लागू नहीं हो सकेगी। इससे विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों को अमेरिका में अपनी पढ़ाई, शोध, कार्यक्रम और पेशेवर गतिविधियां जारी रखने के लिहाज से राहत मिली है।



