बागेश्वर की बेटी सविता तिवारी को मॉरीशस में मिली अहम जिम्मेदारी

संस्कृत भाषा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण-संवर्धन के लिए नए बोर्ड में हुई नियुक्ति
बागेश्वर/मॉरीशस। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की बेटी सविता तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। सविता तिवारी को मॉरीशस के संस्कृत स्पीकिंग यूनियन के नए बोर्ड में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें मॉरीशस के माननीय कला एवं संस्कृति मंत्री की ओर से नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया है।
नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद सविता तिवारी ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को अपने लिए गौरव और अवसर बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें संस्कृत भाषा तथा भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यों के लिए नए बोर्ड का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता है।
उत्तराखंड से मॉरीशस तक संस्कृत की सेतु
सविता तिवारी की यह नियुक्ति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उत्तराखंड की धरती सदियों से संस्कृत, वेद, पुराण और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से गहराई से जुड़ी रही है। ऐसे में बागेश्वर की बेटी का मॉरीशस में संस्कृत भाषा से जुड़े दायित्व तक पहुंचना विशेष महत्व रखता है।
मॉरीशस में भारतीय मूल की बड़ी आबादी रहती है और वहां भारतीय भाषाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का विशेष महत्व है। संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण आधारभूत भाषा रही है। ऐसे में सविता तिवारी की नई भूमिका संस्कृत के प्रति वैश्विक रुचि को बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बन सकती है।
बागेश्वर के लिए गौरव का क्षण
सविता तिवारी की उपलब्धि से उनके गृह क्षेत्र बागेश्वर में भी खुशी का माहौल है। सीमांत हिमालयी क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर संस्कृत और भारतीय संस्कृति से जुड़े दायित्व तक पहुंचना क्षेत्र की प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायी संदेश है।
उनकी यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि उत्तराखंड की बेटियां आज शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तक अपनी पहचान बना रही हैं।

वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति की आवाज
सविता तिवारी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं। संस्कृत को केवल प्राचीन भाषा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में दुनिया के सामने रखने की दिशा में उनका दायित्व अहम हो सकता है।
बागेश्वर की बेटी सविता तिवारी की यह उपलब्धि उत्तराखंड के साथ-साथ उन सभी लोगों के लिए गर्व का विषय है, जो संस्कृत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक प्रसार की दिशा में काम कर रहे हैं।



