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दिल्ली में 1 नवंबर से बिना BS-6 वाले बाहरी कमर्शियल वाहनों की एंट्री बंद, 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम; दफ्तरों का समय भी बदलेगा

नई दिल्ली: सर्दियों के दौरान राजधानी दिल्ली में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने सख्त कार्ययोजना तैयार की है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद कई बड़े फैसलों की जानकारी दी। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा भी मौजूद थे। सरकार ने 1 नवंबर से बाहरी राज्यों में पंजीकृत बिना BS-VI मानक वाले वाहनों की दिल्ली में एंट्री रोकने के साथ पार्किंग शुल्क बढ़ाने, निर्माण कार्यों पर रोक और कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या घटाने का फैसला किया है।

बिना BS-6 वाले बाहरी वाहनों की एंट्री पर रोक

मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे वाहनों को राजधानी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा, जो BS-VI यानी BS-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। CNG वाहनों को कुछ विशेष छूट दी जाएगी। इसके साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच भी सख्त की जाएगी।

1 नवंबर से दोगुना होगा पार्किंग शुल्क

सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों का शुल्क दोगुना करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करना और लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करना है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों और दिल्ली मेट्रो की पार्किंग पर यह बढ़ा हुआ शुल्क लागू नहीं होगा।

दिल्ली में 150 नई इलेक्ट्रिक बसें भी आएंगी

दिल्ली के मौजूदा 5,088 बसों के बेड़े में 150 नई इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जाएंगी। इसके साथ ही लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार मेट्रो और बसों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक परिवहन स्टॉप के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना पर भी काम कर रही है।

50 प्रतिशत कर्मचारियों को करना होगा वर्क फ्रॉम होम

सर्दियों के दौरान सरकारी और निजी कार्यालयों में मौके पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम की जाएगी। बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे। इसके साथ ही अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है।

दिल्ली नगर निगम के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगे, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे। सरकार का उद्देश्य कार्यालय आने-जाने के समय यातायात और उससे जुड़े प्रदूषण के दबाव को कम करना है।

‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम होगा लागू

दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू किया जाएगा। इन पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे लगे हैं। अक्टूबर में इस व्यवस्था को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और नवंबर में प्रदूषण जांच केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा।

कैमरों की भी जांच की जाएगी। तीन ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों पर करीब 2.5 लाख वाहनों का फिटनेस टेस्ट किए जाने की योजना है।

निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर भी रोक

1 नवंबर से 10 दिसंबर तक धूल उड़ाने वाले तोड़फोड़ और बाहरी निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। इसके बाद 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ के सभी कामों, जिसमें इनडोर गतिविधियां भी शामिल हैं, पर पूरी तरह रोक लगाने की योजना है।

सरकार के मॉनिटरिंग सिस्टम में 723 निर्माण स्थल पंजीकृत हैं, जिनमें से 600 पर वेब कैमरे लगाए जा चुके हैं। अक्टूबर के अंत तक सभी पंजीकृत स्थलों को निगरानी के दायरे में लाने का लक्ष्य है। नियमों के उल्लंघन की पहचान के लिए एआई आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के लिए एमसीडी मलबा ऐप पर पंजीकरण भी जरूरी होगा।

62 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर निगरानी

सिरसा के मुताबिक, दिल्ली में चिन्हित 62 प्रदूषण हॉटस्पॉट में से 42 को नियंत्रण में लाया गया है। अधिकारियों ने प्रत्येक हॉटस्पॉट के तीन किलोमीटर के दायरे को कवर करते हुए अलग योजना तैयार की है। इन इलाकों में प्रदूषण के स्रोतों की लगातार निगरानी की जाएगी।

सरकार ने 2026 में 3,065 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा है। 20 सितंबर तक 1,193 किलोमीटर सड़क का काम पूरा होने की जानकारी दी गई थी। 31 अक्टूबर तक बाजारों समेत सभी सड़कों की डीप-क्लीनिंग पूरी करने का लक्ष्य है।

बैठक में पेश की गई रिपोर्ट में 18,484 लंबित शिकायतों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें 6,914 शिकायतें गड्ढों से संबंधित थीं। गड्ढों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए 72 घंटे की प्रक्रिया लागू है।

कूड़ा और लकड़ी जलाने पर भी होगी सख्ती

खुले में कचरा और लकड़ी जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। बेघर लोगों के लिए अस्थायी हीटिंग जोन बनाए जाने की भी योजना है।

सरकार के मुताबिक, 70 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले 71 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। अब लगाए गए पेड़-पौधों और झाड़ियों के जीवित रहने की निगरानी पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए मार्च 2027 में ऑडिट कराने की योजना है।

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