उत्तराखंड

वन अधिकारी सिर्फ प्रशासनिक अफसर नहीं, प्रकृति के प्रहरी हैं: CM धामी

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने वन अधिकारियों से आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता के साथ स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का किया स्वागत

मुख्यमंत्री ने देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की मौजूदगी में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों से संवाद किया। इस दौरान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और परिवीक्षार्थी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन को सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर देश के द्वितीय सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने राज्यसभा के सभापति के रूप में संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया।

70 फीसदी भू-भाग वन क्षेत्र, संरक्षण बड़ी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। प्रदेश के पर्वत, नदियां, वन और समृद्ध जैव विविधता इसकी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में वन अधिकारियों की भूमिका अहम

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के बीच वन अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों से आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता का इस्तेमाल करते हुए वन संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देने को कहा।

उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों को अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों और ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी सर्वोच्च स्थान देना चाहिए। वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं।

पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। मिशन LiFE और एक पेड़ माँ के नाम जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए काम कर रही है।

13 हजार एकड़ वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के तहत लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसका विस्तार जल्द प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी किया जाएगा।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का दिया उदाहरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों। उन्होंने राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर करीब 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख किया। उन्होंने इसे आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण बताया।

मानव-वन्यजीव संघर्ष में मुआवजा बढ़ाकर 10 लाख रुपये

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के परिवहन को आसान बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को मजबूत करने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पिरुल एकत्रीकरण के जरिए ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

1926 हेल्पलाइन और त्वरित प्रतिक्रिया दल को किया मजबूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल और 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण के साथ इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें और वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका तथा समृद्धि भी सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकल्प रहित संकल्प के अनुरूप देश में वनों और पर्यावरण के व्यापक संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने सभी परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

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