सीधी में मातृ मृत्यु के बढ़ते आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, एक साल में 53 महिलाओं की मौत; स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मातृ मृत्यु के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के बाद की अवधि में कुल 53 महिलाओं की मौत दर्ज की गई है। हाल ही में एक प्रसूता की मौत का मामला सामने आने के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं।
प्रसव के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम
जानकारी के मुताबिक 29 अक्टूबर 2025 को एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए बंजारी उप-स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकीय जांच के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने सामान्य प्रसव का भरोसा दिया था। इसी दौरान प्रसव प्रक्रिया को तेज करने के लिए महिला को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें समय रहते खतरे की जानकारी नहीं दी। दोपहर में प्रसव होने के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन उसे दूसरे अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। वहीं नवजात शिशु को स्वस्थ बताया गया है।
मौत के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
घटना से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर जिम्मेदार अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि समय पर बेहतर इलाज और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं तो प्रसूता की जान बचाई जा सकती थी।
स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों की कमी बनी बड़ी समस्या
स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार जिले के कई स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से डॉक्टरों, नर्सों, दवाओं और अन्य जरूरी चिकित्सा संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे मातृ मृत्यु का जोखिम बढ़ता जा रहा है।
समीक्षा बैठकों के बावजूद नहीं सुधरे हालात
अक्टूबर 2025 में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सीधी जिले का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की थी। इस दौरान मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, रेफरल व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बैठक में जिला अस्पताल के विस्तार, नए मातृ एवं शिशु अस्पताल की क्षमता बढ़ाने और स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती का आश्वासन दिया गया था।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया था कि राज्यभर में 16 हजार स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है और सीधी जिले के लिए करीब 300 पद स्वीकृत किए गए हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी चुनौती
सरकारी घोषणाओं के बावजूद स्थानीय स्तर पर अब भी कई पद रिक्त हैं। खासकर एनेस्थीसियोलॉजिस्ट समेत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रही है। जटिल प्रसव के मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध न होने से मरीजों को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए गए सुधार के दावे
स्थानीय विधायक रीति पाठक ने पहले कहा था कि जिला अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं मंजूर की गई हैं। उनके अनुसार आने वाले समय में स्वास्थ्य सुविधाओं में व्यापक सुधार दिखाई देगा। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया था।
जवाबदेही को लेकर उठ रहे बड़े सवाल
जिले में लगातार सामने आ रहे मातृ मृत्यु के मामलों ने स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आंकड़े और हालिया घटनाएं संकेत दे रही हैं कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। वहीं, प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार संस्थाएं और अधिकारी अपनी जवाबदेही कितनी गंभीरता से निभा रहे हैं।



