बडगाम में मुठभेड़, लश्कर का वांटेड आतंकी ‘मूसा’ ढेर; यासिर के बाद सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी

बडगाम: मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। अधिकारियों के मुताबिक, मारा गया आतंकी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का वांटेड सदस्य था। कश्मीर स्थित चिनार कोर ने मारे गए आतंकी की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की है, हालांकि अधिकारियों ने उसकी पहचान सुलेमान शाह उर्फ ‘मूसा’ के रूप में की है।
भारतीय सेना ने बताया कि सेना ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के साथ मिलकर यूसमर्ग के कोराग इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। तलाशी के दौरान जवानों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। सुरक्षाबलों ने जब संदिग्धों को चुनौती दी तो आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया।
दूधपथरी के जंगल में मारा गया मूसा
अधिकारियों के अनुसार, अभियान के दौरान दूधपथरी के दूरदराज वन क्षेत्र में मूसा मारा गया। बताया गया है कि वह पिछले कई वर्षों में पीर पंजाल पर्वतमाला के दोनों ओर हुए कई हमलों में शामिल होने के कारण सुरक्षाबलों के निशाने पर था।
अधिकारियों ने बताया कि मूसा इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकलने में कामयाब रहा था। इसके बाद से सुरक्षा बल उसके साथियों और इलाके में सक्रिय अन्य आतंकियों की तलाश में अभियान चला रहे थे।
यासिर का करीबी सहयोगी था मूसा
सूत्रों के मुताबिक, मूसा लश्कर के आतंकी यासिर का करीबी सहयोगी था। यासिर को इसी महीने की शुरुआत में यूसमर्ग के पास ऊंचे पहाड़ी इलाके में 13 दिन तक चले अभियान के बाद मार गिराया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, यासिर को सुरक्षाबलों ने ‘हाई-वैल्यू टारगेट’ माना था।
पुलिस और सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, यासिर पर इलाके में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल होने का आरोप था। इनमें पुंछ में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हमला, सोनमर्ग, बोटा पाथरी और भट्टा डुरियन में हुए हमले शामिल हैं।
यासिर के एनकाउंटर के बाद बढ़ाई गई निगरानी
यासिर के मारे जाने के बाद सुरक्षा बलों ने हाई अलर्ट जारी रखा था। उसके साथ संपर्क में रहने वाले अन्य आतंकियों का पता लगाने के लिए पीर पंजाल के घने जंगलों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली थी। इसके बाद संयुक्त टीम ने घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। संदिग्ध स्थान के करीब पहुंचते ही छिपे आतंकियों ने गोलीबारी कर दी, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई की।
राजौरी, पुंछ और कठुआ में भी तलाशी अभियान
अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को राजौरी, पुंछ और कठुआ जिलों में करीब एक दर्जन स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इन जिलों के दूरदराज और जंगली इलाकों में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, सीआरपीएफ और बीएसएफ की टीमें संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं।
राजौरी में कालाकोट के पीर खाना, पोथा नरोटा और अंध गांवों के अलावा सुंदरबनी के ठंडा पानी और कंसार इलाकों में तलाशी ली गई। कठुआ में पंजवारी, कठेरा और आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया गया। पुंछ में मेंढर सेक्टर के अपर कसबलारी, थेराटोपा, नागल गली, कालाबन और पटनातीर इलाकों में सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान चलाया।
मूसा के मारे जाने के बाद भी ऑपरेशन जारी
अधिकारियों ने बताया कि दूधपथरी के जंगल में गोलीबारी के दौरान मूसा मारा गया। उसके खिलाफ पीर पंजाल क्षेत्र के दोनों ओर पिछले कई वर्षों में हुए कई हमलों में शामिल होने के आरोप थे। अधिकारियों के मुताबिक, वह इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था, जबकि उसका करीबी सहयोगी यासिर 4/5 सितंबर को हुए उस अभियान में मारा गया था।
अधिकारियों ने मूसा के मारे जाने को जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा के लिए बड़ा झटका बताया है। इलाके में सुरक्षाबलों का अभियान अभी जारी है।



