100 साल पुराने बालकनाथ मंदिर पर चला बुलडोजर, विरोध में कल महापंचायत; 11 सदस्यीय कमेटी ने बनाई आगे की रणनीति

गुरुग्राम: गांव आदमपुर झाड़सा स्थित करीब 100 साल पुराने बाबा बालकनाथ मंदिर को शुक्रवार को बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया। करीब 16 घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान मंदिर परिसर में बने गौशाला, समाधि और देवी-देवताओं के पांच मंदिरों को भी तोड़ा गया। कार्रवाई से पहले पुलिस ने मंदिर की ओर जाने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया था। तोड़फोड़ के विरोध में रविवार सुबह 10 बजे मंदिर स्थल पर पंचायत बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
ग्रामीणों के मुताबिक, गुरुवार देर शाम गुरुग्राम पुलिस के करीब 25 जवान सादे कपड़ों में मंदिर पहुंचे थे। पुलिस ने मंदिर के महंत विजयनाथ महाराज समेत 10 लोगों को हिरासत में लिया। इसके बाद गुरुवार देर रात करीब 2 बजे एचएसवीपी, नगर निगम और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारी करीब 15 बुलडोजर लेकर मंदिर परिसर पहुंचे। कार्रवाई की अगुवाई एचएसवीपी की संपदा अधिकारी अनुपमा मलिक कर रही थीं।
सहायक पुलिस आयुक्त अमित कुमार और विष्णु प्रसाद भी मौके पर मौजूद रहे। कई थानों की पुलिस ने उनके नेतृत्व में मंदिर तक पहुंचने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी थी। किसी तरह के विरोध की आशंका को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
रात 3 बजे शुरू हुई बुलडोजर कार्रवाई
शुक्रवार देर रात करीब 3 बजे मंदिर परिसर में बुलडोजर चलाने की कार्रवाई शुरू हुई। जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे और मंदिर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। ग्रामीणों ने इसके विरोध में प्रदर्शन भी किया।
कार्रवाई के दौरान शिव मंदिर को छोड़कर परिसर में बनी गौशाला, समाधि और देवी-देवताओं के पांच मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया। खाली कराए गए हिस्से की चारदीवारी का काम भी शुरू कर दिया गया। मंदिर में तोड़फोड़ से नाराज साधु-संत पुलिस बैरिकेड के सामने बैठ गए और धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को तोड़कर अपराध किया गया है।
पहले भी हो चुकी थी तोड़फोड़ की कोशिश
बाबा बालकनाथ मंदिर में कार्रवाई की यह पहली कोशिश नहीं थी। 27 जुलाई को भी एचएसवीपी के अधिकारी मंदिर में तोड़फोड़ करने पहुंचे थे, लेकिन उस समय ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
इसके बाद 31 अगस्त को एचएसवीपी की संपदा अधिकारी ने पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में अधिग्रहित जमीन पर भूमाफियाओं की ओर से कब्जा करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
विरोध के लिए 11 सदस्यीय समिति गठित
मंदिर में हुई तोड़फोड़ के विरोध में 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति के सदस्य मंदिर स्थल पर पहुंचे और रविवार को पंचायत आयोजित करने का फैसला लिया।
समिति में 360 गांवों के चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान, वजीराबाद के पूर्व सरपंच सूबे सिंह बोहरा, प्रदीप जेलदार, संदीप ठाकरान, सुरेंद्र ठाकरान, भगत ठाकरान, सोनू ठाकरान और नवीन समेत अन्य लोग शामिल हैं।
चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान ने प्रशासन की कार्रवाई को अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि रविवार सुबह 10 बजे मंदिर स्थल पर पंचायत होगी और इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
1930 में हुआ था मंदिर का निर्माण
ग्रामीणों के मुताबिक, बाबा बालकनाथ मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना है। वर्ष 1930 में बाबा आलोक नाथ ने इसका निर्माण कराया था। ग्राम पंचायत ने मंदिर के लिए उन्हें जमीन दी थी।
मंदिर के साथ करीब तीन एकड़ में जोहड़ था। एचएसवीपी ने वर्ष 2005 में इस जमीन का अधिग्रहण किया था। बाबा आलोक नाथ के बाद बाबा भुरू नाथ और फिर बाबा बालक नाथ मंदिर के महंत रहे। बाबा बालक नाथ ने 18 मार्च 2020 को समाधि ली थी। जोहड़ की जमीन पर मंदिर और समाधियां बनी हुई थीं।
समाधियां टूटने से ग्रामीणों में आक्रोश
तोड़फोड़ के दौरान बाबा बालकनाथ और बाबा भुरूनाथ की समाधियां भी ध्वस्त कर दी गईं। ग्रामीणों के बीच इन समाधियों के प्रति गहरी आस्था थी और वे यहां पूजा-अर्चना करते थे। समाधियों को तोड़े जाने से लोगों में भारी नाराजगी है।
प्रशासन ने ग्रामीणों के संभावित विरोध को देखते हुए पहले से ही मौके पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया था।
मीडियाकर्मियों से बदसलूकी का भी आरोप
तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग पर मीडियाकर्मियों को भी रोक दिया। दो मीडियाकर्मी किसी तरह बैरिकेड पार कर अंदर पहुंच गए। आरोप है कि वहां एचएसवीपी और नगर निगम के अधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की।
इसके बाद एक पुलिस अधिकारी पर मीडियाकर्मियों का मोबाइल फोन छीनने और उन्हें बाहर जाने से रोकने का भी आरोप लगाया गया।
बालकनाथ योगी बोले- मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात
राजस्थान के तिजारा से विधायक महंत बालकनाथ योगी भी मंदिर तोड़े जाने का विरोध दर्ज कराने गुरुग्राम पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भूमाफियाओं के इशारे पर की गई है। उनका दावा है कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गुमराह किया और उन्हें मामले की सही वस्तुस्थिति नहीं बताई।
बालकनाथ योगी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मंदिर और गौशाला तोड़ने से मना किया था। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी।



