काला कोट पहन हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, पूर्व जज काटजू का तंज; BCI ने तलब की रिपोर्ट

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचने और वकीलों का काला गाउन पहनने को लेकर सियासी और कानूनी विवाद तेज हो गया है। इस मामले में पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने तीखी टिप्पणी की है, वहीं बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब वह सुर्खियों में बने रहने के लिए अदालत का सहारा ले रही हैं। काटजू ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि अब हाईकोर्ट ही उनके लिए राजनीतिक मंच बन गया है, जहां वह चर्चा में बने रहने की कोशिश कर रही हैं।
काला गाउन पहनकर हाईकोर्ट पहुंचीं ममता
दरअसल, गुरुवार को ममता बनर्जी वकीलों का काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं। यहां उन्होंने चुनाव के बाद कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई में हिस्सा लिया। सुनवाई के दौरान अदालत में उन्होंने कहा कि “बंगाल कोई बुल्डोजर राज्य नहीं है।”
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने हुई। इस दौरान ममता बनर्जी के साथ चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी मौजूद रहे।
टीएमसी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमले किए गए और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा हुई।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मांगा जवाब
पूरा मामला सामने आने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। परिषद यह जानना चाहती है कि ममता बनर्जी की वकालत से जुड़ी पेशेवर स्थिति क्या है और उनका पंजीकरण वर्तमान में सक्रिय है या नहीं।
नियमों के अनुसार किसी संवैधानिक पद पर रहते हुए सक्रिय रूप से वकालत करने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उनका बार लाइसेंस निलंबित था या नहीं, और यदि निलंबित था तो क्या उसे दोबारा सक्रिय कराया गया।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी की नामांकन तिथि, पंजीकरण संख्या और वकालत की मौजूदा स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है। इस घटनाक्रम के बाद बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।



