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MP के पूर्व सीएम पटवा निधन, श्रद्धांजलि देने भोपाल आएंगे मोदी

patwa_1482899965भोपाल. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा (92) का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे। हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें शहर के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही सीएम शिवराज सिंह चौहान हॉस्पिटल पहुंचे। पीएम मोदी भी पटवा को श्रद्धांजलि देने आज दोपहर भोपाल पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री ने किया ट्वीट…
-पटवा के निधन पर नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके शोक जताया है। उन्होंने कहा कि वे समर्पित और कर्मशील नेता थे। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
-पटवा के निधन की खबर लगते ही बंसल हॉस्पिटल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित तमाम बड़े नेता पहुंचे।
– 11 नवंबर 1924 को जन्मे पटवा पहली बार 20 जून, 1980 से 17 फरवरी 1980 तक सीएम रहे।
– इसके बाद वे 5 मार्च, 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
– बुधवार शाम 4 बजे अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को भोपाल स्थित बीजेपी ऑफिस में रखा जाएगा।
– देर शाम उनके पार्थिव शरीर को नीमच भेजा जाएगा, जहां गुरुवार दोपहर 2 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
– पटवा के निधन पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 3 दिन के राजकीय शोक का एलान किया गया है।
सीएम ने जताया दुख
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि यह उनके लिए अपूरणीय क्षति है। सीएम ने पटवा के कार्यों का स्मरण करते हुए कहा कि वे बेहतर प्रशासक थे और उन्होंने राज्य में भाजपा संगठन के लिए भी बहुत कार्य किया।
एक युग समाप्त हुआ: मिश्रा
मप्र के जनसंपर्क, जलसंसाधन तथा संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पटवा के निधन से एक युग समाप्त हो गया है
ऐसा रहा पटवा के राजनीतिक सफर
– सुंदर लाल पटवा 18 साल की उम्र में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे।
– 1947 से 1951 तक संघ प्रचारक के रूप में काम किया। 1948 से संघ आंदोलन में उन्हें सात माह जेल में भी रहना पड़ा।
– 1951 में जब आरएसएस के राजनीतिक संगठन भारतीय जनसंघ का गठन हुआ तो पटवा इसके सक्रिय सदस्य थे।
– 1957 में पहली बार विधानसभा सदस्य बने। 1967 तक विधायक रहे। बाद में जिला सहकारी बैंक के अध्‍यक्ष बनाए गए।
– आपातकाल के दौरान 27 जून, 1975 से 28 जनवरी, 1977 तक मीसा बंदी के रूप में जेल में रहे।
-1980 में सीहोर से विधानसभा सदस्‍य निर्वाचित होकर भाजपा के नेता एवं सदन में विरोधी दल के नेता बने।
-1985 में फिर विधानसभा सदस्‍य चुने गए तथा लोक लेखा समिति के सभापति एवं सामान्‍य प्रयोजन समिति के सदस्‍य रहे।
-1986 से भाजपा के प्रदेशाध्‍यक्ष रहे। 1993 में फिर विधानसभा सदस्‍य निर्वाचित हुए।
– 1997 में छिंदवाड़ा सीट के लिए हुए लोकसभा उपचुनाव में पहली बार सांसद चुने जाने गए और फिर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के पद पर उन्होंने कार्य किया।
 

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