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नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, गोवा में ली आखिरी सांस; फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर

नई दिल्ली: फिल्म जगत से बेहद दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता के निधन की पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद मेडिकल टीम को गोवा स्थित उनके फ्लैट पर भेजा गया। वहां वह बेहोश मिले।

सुबह 5.20 बजे डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

मेडिकल टीम ने नाना पाटेकर को तत्काल कार्डियक मसाज दी और इसके बाद अस्पताल ले जाया गया। गोवा के मणिपाल अस्पताल की मेडिकल टीम ने सुबह 5.20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। बेटे मल्हार ने बताया कि फिलहाल उनके पास घटना से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं है और वह गोवा पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी लेंगे।

8 अक्टूबर को सामने आई नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। उनके प्रशंसकों और साथी कलाकारों के लिए यह खबर बेहद सदमे वाली है।

आखिरी समय तक फिल्मों और ओटीटी में थे सक्रिय

नाना पाटेकर फिल्मों में लगातार काम कर रहे थे और उन्हें पूरी तरह फिट माना जाता था। उनकी पिछली रिलीज फिल्म ‘ओ रोमियो’ थी। फिल्मों के साथ-साथ वह ओटीटी परियोजनाओं में भी सक्रिय थे। अचानक उनके निधन की खबर ने प्रशंसकों को झकझोर दिया है।

दमदार अभिनय और अलग अंदाज से बनाई खास पहचान

नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय, संवाद अदायगी और अलग अंदाज से खास पहचान बनाई। उन्होंने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद ‘सिंहासन’, ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’ और ‘सलाम बॉम्बे!’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।

वर्ष 1992 में आई ‘अंगार’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। वहीं ‘क्रांतिवीर’ उनके करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल रही। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में भी नाना पाटेकर ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उन्होंने खलनायक से लेकर गंभीर और हास्य भूमिकाओं तक अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।

अभिनेता के साथ निर्देशक और लेखक भी थे

नाना पाटेकर ने अभिनय के अलावा निर्देशन और लेखन में भी काम किया। वर्ष 1991 में आई फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ से उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा था। सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाले कलाकार के तौर पर भी उनकी अलग पहचान रही।

मां से था बेहद गहरा लगाव

नाना पाटेकर का मूल नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में एक सामान्य परिवार में हुआ था। उनके पिता गजानन पाटेकर कपड़े के व्यवसाय से जुड़े थे, जबकि मां निर्मला पाटेकर गृहणी थीं।

नाना छह भाई-बहनों में से एक थे। उनके पांच भाई-बहनों का कम उम्र में ही निधन हो गया था। उनके दो भाई अशोक पाटेकर और दिलीप पाटेकर बताए जाते हैं। नाना का अपनी मां से बेहद गहरा लगाव था। वर्ष 2019 में 99 साल की उम्र में उनकी मां निर्मला पाटेकर का निधन हुआ था।

1978 में नीलकांति से हुई थी शादी

नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में नीलकांति पाटेकर से विवाह किया था। दोनों की मुलाकात मराठी रंगमंच के दौरान हुई थी। नीलकांति पूर्व बैंक अधिकारी होने के साथ मराठी अभिनेत्री और निर्माता भी हैं। उन्होंने ‘आत्मविश्वास’ जैसी मराठी फिल्मों और कई नाटकों में अभिनय किया।

बाद के वर्षों में नाना पाटेकर और नीलकांति अलग रहने लगे थे। हालांकि, दोनों के बीच सम्मान का रिश्ता कायम रहा और पारिवारिक मौकों पर वे साथ भी नजर आते थे।

बड़े बेटे को खोने का दर्द भी झेला

नाना पाटेकर के परिवार में एक बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी भी रही। शादी के बाद उनके बड़े बेटे का जन्म हुआ था, लेकिन वह जन्म से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। महज ढाई साल की उम्र में उसका निधन हो गया था। इस घटना ने नाना पाटेकर को गहरा मानसिक आघात पहुंचाया था।

उनके छोटे बेटे मल्हार पाटेकर हैं। मल्हार फिल्म जगत से जुड़े हुए हैं और कई परियोजनाओं में सहायक निर्देशक के तौर पर काम कर चुके हैं।

समाज सेवा में भी सक्रिय रहे नाना

नाना पाटेकर को उनके दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और यथार्थवादी अभिनय शैली के लिए हमेशा याद किया जाएगा। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘तिरंगा’, ‘अपहरण’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।

अभिनय के अलावा नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे। उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों की मदद और समाज सेवा के काम किए। उनके निधन की खबर के बाद फिल्म जगत, राजनीतिक हस्तियों और देश-विदेश में मौजूद उनके प्रशंसकों की ओर से श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया है।

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