मध्य प्रदेशराज्य

MP के जंगलों में नई पहल! चरवाहे बनेंगे वन्यजीवों के प्रहरी, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को ₹22.79 करोड़ की बड़ी योजना मंजूर

भोपाल: मध्य प्रदेश में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए वन विभाग ने एक नई और अनूठी पहल शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर ‘चरवाहा सम्मेलन’ आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों के माध्यम से जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले चरवाहों तथा ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।

वन विभाग का मानना है कि चरवाहे जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों के सबसे नजदीकी संपर्क में रहते हैं। ऐसे में उन्हें जागरूक बनाकर वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

टाइगर फाउंडेशन समिति की बैठक में लिया गया फैसला

यह निर्णय मंत्रालय में आयोजित मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति की 22वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने की। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और गति बढ़ाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि अब समिति की बैठक हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए।

बैठक में प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्वों के अधिकारियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया और अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति तथा चुनौतियों की जानकारी साझा की।

वन्यजीव संरक्षण के लिए ₹22.79 करोड़ की मंजूरी

बैठक के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके आवास विकास को बेहतर बनाने के लिए 22.79 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बजट का उपयोग कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में किया जाएगा।

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर रहेगा फोकस

स्वीकृत योजनाओं में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग और स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर विशेष जोर दिया गया है। विभाग का लक्ष्य ऐसे क्षेत्रों में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है, जहां वन्यजीव और मानव आबादी का संपर्क अधिक होता है।

ब्लैक बक संरक्षण के लिए विशेष अभियान

बैठक में काले हिरणों के संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू और आवश्यकतानुसार स्थानांतरण के लिए विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा वन्यजीवों के व्यवहार और उनके आवास से जुड़े विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने तथा वन अमले को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करने पर भी सहमति बनी।

2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना को भी मिली मंजूरी

समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी वार्षिक कार्ययोजना को भी स्वीकृति प्रदान कर दी। इससे आगामी वर्ष में वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान और प्रबंधन से जुड़े कार्यों को तय समयसीमा में लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

बैठक में वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा, टाइगर सेल के अध्यक्ष एवं अपर पुलिस महानिदेशक सहित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के सदस्य सचिव भी शामिल हुए। वहीं प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्वों के संचालकों ने वर्चुअल माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

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