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बंगाल में जूट खेत से नकदी मिलने के दावे पर मचा सियासी बवाल, कथित भ्रष्टाचार मामले ने पकड़ा तूल

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बदुरिया क्षेत्र में जूट के एक खेत से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के दावों ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। मामले में स्थानीय नगरपालिका पदाधिकारी और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेता दीपांकर भट्टाचार्य का नाम सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। हालांकि पूरे मामले की आधिकारिक जांच अभी जारी है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक खेत में खोदे गए गड्ढों के भीतर छिपाकर रखी गई बोरियों और बैगों से नकदी मिलने का दावा किया गया। बताया जा रहा है कि बरामद रकम करोड़ों रुपये तक हो सकती है। नकदी को बाहर निकालने और जांच प्रक्रिया पूरी करने में पुलिस को कई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।

शुरुआती दावों में यह भी कहा गया कि इससे पहले भी एक कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी, जिससे मामले को लेकर संदेह और बढ़ गया है।

स्थानीय सूचना के बाद शुरू हुई जांच

सूत्रों के अनुसार जिस खेत से नकदी मिलने का दावा किया जा रहा है, वह बदुरिया क्षेत्र के एक निवासी का बताया जा रहा है, जिसे संबंधित नेता का करीबी सहयोगी माना जाता है। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति ने खेत में संदिग्ध गड्ढे देखे, जिसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान खेत में दबाकर रखी गई वस्तुओं से नकदी मिलने की बात सामने आने के बाद पूरे इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बन गया। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर तलाशी अभियान चलाया और आसपास के क्षेत्रों में भी जांच तेज कर दी है।

स्थानीय राजनीति से जुड़े नाम आने पर बढ़ा विवाद

दीपांकर भट्टाचार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई कि उन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से राजनीति में कदम रखा था और धीरे-धीरे स्थानीय राजनीति में प्रभाव बढ़ाया। बाद में वे नगरपालिका स्तर तक पहुंचे। आरोपों के अनुसार उनके खिलाफ समय-समय पर वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं।

रिपोर्ट्स में सरकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों में कथित अनियमितताओं और लाभार्थियों से अवैध वसूली जैसे आरोपों का भी जिक्र किया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों को लेकर अब तक जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है और मामला फिलहाल जांच के दायरे में ही है।

राजनीतिक माहौल गरमाया, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग उठाई है। वहीं प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक संबंधित स्थानों की तलाशी, दस्तावेजों की जांच और अन्य संभावित कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।

यह मामला सामने आने के बाद राज्य में एक बार फिर भ्रष्टाचार, राजनीतिक जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। फिलहाल जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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