CBI को और ताकतवर बनाने की तैयारी, वैधता पर सवालों के बीच कानून में संशोधन की कवायद

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को अधिक प्रभावी और कानूनी रूप से स्पष्ट आधार देने के लिए केंद्र सरकार दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 में संशोधन पर विचार कर रही है। इसी कानून के तहत सीबीआई को जांच से जुड़ी शक्तियां हासिल हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अधिनियम में कहीं भी सीबीआई का नाम दर्ज नहीं है।
सीबीआई को किसी राज्य में जांच करने के लिए वहां की सरकार की सहमति की आवश्यकता होती है। फिलहाल आठ राज्यों ने सामान्य सहमति वापस ले रखी है। सीबीआई निदेशक ने 8 जुलाई 2025 को 14 राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर डीएसपीई अधिनियम की धारा 3 के तहत आने वाले अपराधों की जांच के लिए सहमति देने का अनुरोध किया था। इन राज्यों में बिहार, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल थे।
कानूनी आधार मजबूत करने की तैयारी
केंद्र सरकार सीबीआई की वैधता और उसके अधिकारों को लेकर कानून में संशोधन की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस संबंध में सरकार कानूनी सलाह ले रही है। साथ ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत की संभावना जताई जा रही है। सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी इंतजार कर रही है।
सहमति वापस लेने वाले राज्यों से बातचीत की सिफारिश
साइबर अपराध और उसकी रोकथाम से जुड़ी संसदीय समिति की 259वीं रिपोर्ट में भी इस मुद्दे को उठाया गया है। समिति ने गृह मंत्रालय से उन राज्य सरकारों के साथ बातचीत करने की सिफारिश की है, जिन्होंने सीबीआई जांच के लिए सामान्य सहमति नहीं दी है। रिपोर्ट में इस व्यवस्था से पैदा होने वाली अड़चन का स्थायी समाधान तलाशने पर जोर दिया गया है।
इन आठ राज्यों ने वापस ली सामान्य सहमति
पश्चिम बंगाल, केरल, झारखंड, पंजाब, मेघालय, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक ने सीबीआई को सामान्य सहमति देने से इनकार किया है। ऐसे में इन राज्यों में सीबीआई की जांच के लिए अलग से राज्य सरकार की मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है।



