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राजस्थान हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: ‘वैध शादी में पत्नी से संबंध रेप नहीं’, पति पर दर्ज FIR रद्द

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए पति के खिलाफ दर्ज रेप की FIR को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि शादी वैध है और महिला बालिग है, तो पति पर बलात्कार का मामला नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून का दुरुपयोग कर बदले की भावना से मुकदमे दर्ज करना न्याय व्यवस्था पर बोझ बढ़ा रहा है।

यह फैसला जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक ही मामले में पति पर दहेज प्रताड़ना और रेप जैसे आरोप लगाना गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या कोई महिला एक ही समय में किसी पुरुष की पत्नी भी हो सकती है और उसी के खिलाफ रेप पीड़िता भी?

कोर्ट बोला- वैध विवाह में रेप का मामला नहीं बनता

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यदि विवाह कानूनी रूप से वैध है और शादी के समय पत्नी की उम्र 18 वर्ष से अधिक थी, तो पति के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने पति के खिलाफ दर्ज रेप का मामला रद्द करते हुए उसे राहत दे दी।

कोर्ट ने कहा कि इस तरह की “फिजूल मुकदमेबाजी” अब एक तरह का फैशन बन चुकी है, जिसकी वजह से अदालतों में मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है और वास्तविक पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा।

पति-पत्नी विवाद के बाद दर्ज हुआ था केस

मामले के अनुसार, महिला ने पति के साथ विवाद के बाद उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न और रेप समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर अदालत ने केस की परिस्थितियों और तथ्यों की जांच की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामला व्यक्तिगत रंजिश और प्रतिशोध की भावना से प्रेरित प्रतीत होता है। कोर्ट ने कहा कि जब विवाह वैध है, तब रेप का आरोप टिक नहीं सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित ‘नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ’ फैसले का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और कानून की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि वैवाहिक विवादों को कानूनी प्रक्रिया और आपसी सहमति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए, न कि कानून को बदले के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाए।

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