50 के बाद भी रहना है फिट और एक्टिव? रोज करें ये 4 योगासन, शरीर में लौटेगा लचीलापन और ऊर्जा

नई दिल्ली: बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कमजोरी, अकड़न और लचीलेपन की कमी महसूस होना आम बात है। कई लोगों को जोड़ों में जकड़न, कमर दर्द और शारीरिक सक्रियता में कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए योग एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। नियमित रूप से कुछ आसान योगासन करने से शरीर का लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और दैनिक गतिविधियों को करने में आसानी होती है। आइए जानते हैं ऐसे चार योगासन, जो बढ़ती उम्र में भी शरीर को सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
पर्श्वोत्तनासन: कमर और पैरों को देता है मजबूती
पर्श्वोत्तनासन शरीर के निचले हिस्से, कमर और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक माना जाता है। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े होकर पैरों के बीच पर्याप्त दूरी बनाएं। एक पैर को आगे रखते हुए शरीर को धीरे-धीरे झुकाएं और हाथों को जमीन की ओर ले जाएं। इस दौरान माथे को आगे वाले घुटने के करीब लाने का प्रयास करें।
कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य अवस्था में लौटें और दूसरी ओर से प्रक्रिया दोहराएं।
अधोमुखश्वानासन: पूरे शरीर में बढ़ाता है लचीलापन
अधोमुखश्वानासन शरीर की मांसपेशियों को खिंचाव देने और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसे करने के लिए हाथों और घुटनों के बल आएं। इसके बाद कूल्हों को ऊपर उठाकर शरीर को उल्टे ‘V’ आकार में लाएं।
इस मुद्रा में एड़ियों को जमीन की ओर दबाने का प्रयास करें। कुछ सेकंड तक रुकने के बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं। नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन और लचीलापन बेहतर हो सकता है।
मालासन: घुटनों और कूल्हों के लिए फायदेमंद
मालासन को स्क्वाटिंग पोज भी कहा जाता है। यह आसन कूल्हों, घुटनों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
इसे करने के लिए मलत्याग की मुद्रा की तरह बैठ जाएं और दोनों हाथों को नमस्कार की स्थिति में जोड़ लें। कोहनियों को घुटनों से लगाकर धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें। कुछ देर तक इस स्थिति में बने रहने के बाद धीरे-धीरे खड़े हो जाएं।
नियमित अभ्यास से शरीर की गतिशीलता में सुधार देखा जा सकता है।
उत्तानासन: रीढ़ और हैमस्ट्रिंग के लिए लाभकारी
उत्तानासन शरीर के पिछले हिस्से की मांसपेशियों को खिंचाव देने वाला प्रभावी योगासन माना जाता है। इसे करने के लिए सीधे खड़े होकर गहरी सांस लें और दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और हाथों को जमीन या पैरों के अंगूठों तक ले जाने का प्रयास करें। कुछ क्षण रुकने के बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं।
यह आसन रीढ़ की हड्डी, पैरों और कमर को लचीला बनाए रखने में मदद कर सकता है।
नियमित योग से मिल सकते हैं कई फायदे
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की ताकत, संतुलन और लचीलापन बेहतर होता है। साथ ही तनाव कम करने, मानसिक शांति बनाए रखने और उम्र बढ़ने के साथ आने वाली कई शारीरिक समस्याओं के जोखिम को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
हालांकि किसी भी नए योग अभ्यास को शुरू करने से पहले उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक क्षमता के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।



