
नई दिल्ली: चेक बाउंस से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामलों में बकाया रकम चुकाने का वादा पूरा नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। पीठ ने मंगलवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया और मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए पहले मामले के तौर पर सूचीबद्ध करने को कहा।
‘हो सकता है वे आपसे ज्यादा अमीर हों, लेकिन रकम आपने हड़पी’
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने शिकायतकर्ता के बारे में कहा कि वे गरीब नहीं हैं। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि संभव है शिकायतकर्ता अभिनेता से अधिक अमीर हों, लेकिन रकम उनसे ली गई है। न्यायमूर्ति बागची ने यह भी कहा कि इस तरह के अहंकार को सही जगह दिखाने की जरूरत है और व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि कब क्या बोलना है।
इसी दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “आपकी जगह जेल में है।”
दो करोड़ रुपये जमा करने का दिया था निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को राजपाल यादव को दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया था। अदालत ने उन्हें निजी कंपनी की बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने और शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था।
सोमवार को पीठ ने कहा कि दो सप्ताह की समय सीमा खत्म हो चुकी है और पांच अक्टूबर तक कोई भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि राजपाल यादव को सोमवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।
50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की एक प्रति अदालत में पेश की। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट बैंक में है और उसकी प्रक्रिया चल रही है। इस पर पीठ ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तविक है या नहीं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने अभिनेता पर अदालत के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजपाल यादव फिल्म अभिनेता हैं और अदालत में भी अभिनय कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता को संस्था की गरिमा का सम्मान नहीं है।
2010 में फिल्म के लिए ली थी पांच करोड़ की मदद
शिकायतकर्ता मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अनुसार, वर्ष 2010 में एक फिल्म के लिए राजपाल यादव को पांच करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी गई थी। इस रकम के निपटारे के लिए वर्ष 2013 में यादव की ओर से 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए गए थे। कंपनी का आरोप है कि ये सभी चेक बाउंस हो गए।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, वर्ष 2012 में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते में राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी।
साढ़े चार महीने जेल में रह चुके हैं राजपाल यादव
15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को आत्मसमर्पण करने से मिली छूट को पांच अक्टूबर तक बढ़ाया था। उस समय पीठ ने उनके आचरण पर भी नाराजगी जताते हुए कहा था कि वह नाटक करने में माहिर हैं और अदालत के पहले के आदेशों का पालन नहीं किया गया है।
पीठ ने यह भी कहा था कि यादव के आचरण से विश्वास पैदा नहीं होता, लेकिन उन्हें अंतिम मौका दिया जा रहा है। राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने हेतु दो सप्ताह का समय मांगा था और अपनी बातों की प्रमाणिकता साबित करने के लिए दो करोड़ रुपये जमा करने की बात कही थी।
वकील ने यह भी बताया था कि राजपाल यादव करीब साढ़े चार महीने जेल में रह चुके हैं और मनोरंजन उद्योग में उनके दोस्तों ने उन्हें जमानत दिलाई थी। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता बकाया रकम को लेकर है, क्योंकि राजपाल यादव अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर पाए हैं।



