आगामी विधानसभा चुनावों में SIR और UGC के मुद्दे बढ़ा सकते हैं BJP की चुनौती, नए प्रभारियों के सामने संगठन संभालने की बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली: आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा के नए प्रदेश प्रभारियों ने पार्टी नेतृत्व के सामने जमीनी स्तर की कई चुनौतियां रखी हैं। मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में हुई करीब चार घंटे की बैठक में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर समेत चुनावी राज्यों से जुड़े प्रभारियों ने एसआईआर, यूजीसी के नए नियमों और अयोध्या में चढ़ावे से जुड़ी शिकायतों को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। बैठक में उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच कथित दूरी की चर्चाओं का मुद्दा भी उठा। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि ऐसी भ्रामक सूचनाओं का जवाब दिया जाना चाहिए और योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा समर्थन प्राप्त है।
हाल में संगठन में हुए व्यापक फेरबदल के बाद नवनियुक्त प्रभारियों और सह प्रभारियों की यह पहली औपचारिक सामूहिक बैठक थी। बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश और सौदान सिंह समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नबीन ने शुरुआत में ही प्रभारियों से अपने-अपने राज्यों की जमीनी स्थिति खुलकर रखने को कहा।
SIR को लेकर चुनावी राज्यों में चिंता
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर समेत चुनावी राज्यों के प्रभारियों ने एसआईआर को आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण मुद्दा बनने की आशंका जताई। उनका कहना था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयुक्तों से जुड़े हालिया घटनाक्रम को विपक्ष जिस तरह उठा रहा है, उससे लोगों के बीच भ्रम और शंका की स्थिति बन रही है।
प्रभारियों ने नेतृत्व को बताया कि इस मुद्दे को लेकर जमीनी स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब देना जरूरी है। नबीन ने भी प्रभारियों से कहा कि एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की ओर से दी गई स्थिति की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए।
यूजीसी के नए नियमों पर भी जताई गई चिंता
उत्तर भारतीय राज्यों के कुछ प्रभारियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लेकर भी चिंता जताई। बैठक में कहा गया कि इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। कुछ नेताओं ने बताया कि यूजीसी से जुड़े नियमों को लेकर जमीनी स्तर पर भी चर्चा हो रही है और इससे पैदा हो रहे भ्रम को दूर करना जरूरी है।
अयोध्या में चढ़ावे से जुड़ी चोरी के आरोपों का मुद्दा भी बैठक में उठा। प्रभारियों ने इस मामले को लेकर अपनी आशंकाएं नेतृत्व के सामने रखीं। नबीन ने नकारात्मक सूचनाओं का तथ्यात्मक जवाब जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया।
गलत सूचनाओं का तथ्य के साथ जवाब देने का निर्देश
नबीन ने प्रभारियों से कहा कि विपक्ष की ओर से सामने रखी जा रही नकारात्मक सूचनाओं का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाए। उन्होंने एसआईआर को लेकर तीनों चुनाव आयुक्तों की ओर से स्पष्ट की गई स्थिति को भी जनता तक पहुंचाने को कहा।
इसके साथ ही चुनावी राज्यों में आपसी कलह, अंदरूनी खींचतान और भितरघात रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया गया। पार्टी नेतृत्व ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर भी जोर दिया।
यूपी और दिल्ली के बीच दूरी की चर्चा पर नबीन का जवाब
बैठक में एक प्रभारी ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच दूरी की खबरों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इस तरह की चर्चाएं पार्टी के लिए मुश्किल पैदा करती हैं। इस पर नितिन नबीन ने कहा कि ऐसी भ्रामक सूचनाओं का प्रतिकार किया जाना चाहिए।
नबीन ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने संगठन से ऐसी चर्चाओं को लेकर स्पष्ट स्थिति जनता तक पहुंचाने को कहा।
बिहार के लिए अलग रणनीति पर जोर
बिहार के प्रभारी हरीश द्विवेदी को नबीन ने राज्य के लिए अलग नजरिये से रणनीति तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बिहार की परिस्थितियां उत्तर प्रदेश से अलग हैं और यहां रणनीति बनाते समय जातीय समीकरणों को ध्यान में रखना होगा।
युवाओं से सीधा संवाद और बूथ स्तर पर फोकस
नबीन ने सभी प्रभारियों से नियमित रूप से अपने राज्यों का दौरा करने और अलग-अलग क्षेत्रों में युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने को कहा। बूथ स्तर की बैठकों में युवाओं की राय को प्राथमिकता देने और उनकी अपेक्षाओं को राज्य सरकारों तक पहुंचाने का निर्देश भी दिया गया।
उन्होंने कहा कि युवाओं से मिली जानकारी और उनकी अपेक्षाओं का पूरा ब्योरा केंद्रीय नेतृत्व तक नियमित रूप से पहुंचाया जाना चाहिए। साथ ही जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहां सरकार और संगठन के बीच मतभेद को स्वीकार नहीं किए जाने की बात भी स्पष्ट की गई।



