ऋषिकेश। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि भारत की असली पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में निहित है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को परमार्थ निकेतन आश्रम में आयोजित अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ में सहभागिता के दौरान कही।
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी पत्नी गीता धामी और यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट के साथ मां गंगा का पूजन और अभिषेक किया तथा महायज्ञ में भाग लेकर प्रदेश की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
‘उत्तराखंड आध्यात्मिक चेतना का केंद्र’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि पूरे देश की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहां की धार्मिक परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में आयोजित यह महायज्ञ मानवता के कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, विश्व शांति और आंतरिक जागरण का संदेश दे रहा है।
सनातन संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का संगम
सीएम धामी ने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजन उत्तराखंड की गरिमा, सनातन संस्कृति की शक्ति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मकता और सामूहिक चेतना का विस्तार होता है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बताया आयोजन का महत्व
महायज्ञ के दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हिमालय की गोद और मां गंगा की पवित्र धारा में बसे उत्तराखंड से पूरी मानवता को योग, शांति और धर्म का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि जब शासन और आध्यात्मिकता का समन्वय होता है, तो समाज में संतुलन और सेवा भाव का विस्तार होता है।
वैदिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन
इस महायज्ञ में बड़े स्तर पर वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इसमें 15 हजार रुद्रम मंत्रों का जाप, 1500 रुद्र होम, 300 दुर्गा सप्तशती पाठ और 300 चंडी होम संपन्न हो रहे हैं। इसके साथ ही रुद्रम, रुद्र घनम्, महान्यासम्, अरुण प्राश्नम् और अन्य वैदिक विधियों का भी आयोजन किया जा रहा है।




