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सर्दी में बच्चों- बुजुर्गों के लिए रहता है रिस्क, जानें निमानिया से बचाव के उपाय

नई दिल्ली : सर्दी का मौसम यूं तो मजेदार होता है लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से ये मौसम बच्चों और बुजु्र्गों के लिए काफी रिस्की हो जाता है. कमजोर इम्यूनिटी के चलते इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को फेफड़ों का संक्रमण होने पर निमोनिया का खतरा पैदा हो जाता है. इस मौसम में निमोनिया के साथ साथ सांस संबंधी अन्य बीमारियां भी शरीर पर जल्दी हमला करती हैं. ऐसे में हर साल इस मौसम में निमोनिया और सांस संबंधी बीमारियों के मरीज अस्पतालों में बढ़ जाते हैं. चलिए जानते हैं कि निमोनिया के संकेत क्या है और किस तरह के उपाय अपनाकर आप इस बीमारी से बच सकते हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं निमोनिया फेफड़ों का एक गंभीर संक्रमण है जिसका शिकार छोटे बच्चे,कमजोर लोग और बुजुर्ग लोग होते हैं. निमोनिया संक्रमण तब होता है जब वायरस के चलते फेफड़ों में सूजन आ जाती है और फेफड़ों में पानी भर जाता है. इसके मुख्य लक्षणों में बुखार, खांसी और थकावट शामिल हैं. मरीज को बलगम वाली खांसी होती है. बुखार के साथ साथ पसीना और कंपकंपी आती है. सांस लेने में परेशानी होती है और सांस लेने पर फेफड़ों से अजीब सी घरघराहट की आवाज आती है. सीने में दर्द होता है,भूख लगनी कम होती है या बंद हो जाती है. निमोनिया के शिकार बच्चे के होठ और नाखूनों का रंग नीला दिखने लगता है. बच्चों के साथ साथ बुजुर्गों को भी निमोनिया का ज्यादा खतरा होता है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. खासकर डायबिटीज और हाई बीपी के शिकार बुजुर्गों को इस मौसम में निमोनिया से बचाए रखने के लिए ज्यादा कवायद करने की जरूरत होती है।

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि उपचार से बचाव ज्यादा बेहतर है और ऐसे में बच्चों को निमोनिया से बचाए रखने के लिए मां बाप कई तरह के असरदार उपाय कर सकते हैं. सर्दियों के मौसम में बच्चों को सर्दी से बचाए रखने के लिए गर्म कपड़े पहनाकर रखें. अगर बच्चे को एंटी बायोटिक दी जा रही है तो उसका पूरा कोर्स करवाएं. बच्चे के आस पास साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें. बच्चे को निमोनिया की वैक्सीन जरूर लगवाएं. अगर बच्चे को सर्दी लगी है तो उसके सीने पर विक्स लगाकर सुलाएं. बच्चों को कुछ देर धूप का एक्सपोजर दिलवाएं, इससे बच्चे के शरीर को गर्माहट मिलती है. छोटे बच्चे पेशाब करते हैं तो उनको देर तक गीला छोड़ने की बजाय समय समय पर चैक करते रहें. इस दौरान बच्चे को डाइपर पहनाकर रखें ताकि उसका शरीर सूखा रहे।

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