दिसंबर 2026 तक ऑटो सेक्टर में बनी रहेगी जबरदस्त मांग, सप्लाई चेन और भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ी चुनौती

देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी का दौर अभी थमने वाला नहीं है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वाहनों की मजबूत मांग अगले दो से तीन तिमाहियों यानी दिसंबर 2026 तक जारी रह सकती है। पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल, दोपहिया, ट्रैक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों समेत लगभग सभी सेगमेंट में बिक्री लगातार बढ़ रही है। हालांकि इस तेजी के बीच सप्लाई चेन में बाधाएं और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव ऑटो उद्योग के लिए बड़ी चिंता बनकर उभर रहे हैं।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत ऑटो सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2026 तक ऑटो उद्योग में ऊंची वृद्धि दर बनी रहने की संभावना है, जबकि वर्ष 2027 में इसमें धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौट सकती है।
ग्रामीण मांग और प्रीमियम वाहनों ने बढ़ाई रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी दरों में कटौती के बाद उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता बढ़ी है, जिसका सीधा असर वाहन बिक्री पर दिखाई दे रहा है। ग्रामीण इलाकों में बेहतर आर्थिक माहौल और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग ने भी ऑटोमोबाइल बाजार को मजबूती दी है।
भू-राजनीतिक तनाव और महंगी ढुलाई बनी चिंता
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव आने वाले महीनों में उद्योग के लिए बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। खासतौर पर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में निर्यात और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
इसके अलावा माल ढुलाई की बढ़ती लागत, कच्चे माल की महंगाई और सप्लाई चेन में संभावित रुकावटें भी उद्योग की प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।
टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी ने दिखाई दमदार बढ़त
पैसेंजर वाहन सेगमेंट में अप्रैल 2026 के दौरान घरेलू थोक बिक्री में सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेजी में टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी की सबसे बड़ी भूमिका रही। टाटा मोटर्स की बिक्री में 31 प्रतिशत जबकि मारुति सुजुकी की बिक्री में 32 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया।
महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंडई ने भी क्रमशः 8 प्रतिशत और 17 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक मारुति सुजुकी को यूटिलिटी व्हीकल, कॉम्पैक्ट कार और मिनी कार सेगमेंट में मजबूत मांग का फायदा मिला।
टोयोटा किर्लोस्कर ने भी 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर और किआ की बिक्री में क्रमशः 4 प्रतिशत और 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
कमर्शियल वाहनों की बिक्री में भी तेज उछाल
कमर्शियल वाहन सेगमेंट में भी मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। अशोक लेलैंड को छोड़कर इस श्रेणी में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी और माल ढुलाई गतिविधियों के स्थिर बने रहने से इस सेगमेंट को समर्थन मिला।
टाटा मोटर्स ने यहां भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। छोटे कमर्शियल वाहनों, खासकर कार्गो और पिकअप सेगमेंट में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही।
वहीं आयशर-वोल्वो के संयुक्त उपक्रम वीई कमर्शियल व्हीकल्स और महिंद्रा के हल्के कमर्शियल वाहन कारोबार में क्रमशः 9 प्रतिशत और 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
दोपहिया वाहनों की मांग में जबरदस्त तेजी
दोपहिया वाहन बाजार में भी जोरदार उछाल देखने को मिला। बजाज ऑटो को छोड़कर इस श्रेणी में करीब 30 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। हीरो मोटोकॉर्प की बिक्री में 85 प्रतिशत और रॉयल एनफील्ड की बिक्री में 37 प्रतिशत की मजबूत बढ़त रही।
टीवीएस मोटर कंपनी ने 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 36 प्रतिशत की तेजी का बड़ा योगदान रहा। हालांकि सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते मोटरसाइकिल बिक्री में 9 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई।
निर्यात के मोर्चे पर भी उद्योग को राहत मिली और कुल निर्यात में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हालांकि अलग-अलग कंपनियों का प्रदर्शन अलग रहा।
ट्रैक्टर, तीन-पहिया और ईवी सेगमेंट में भी रिकॉर्ड मांग
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रैक्टर बाजार में भी मांग मजबूत बनी हुई है। घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में लगभग 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खेती के अनुकूल माहौल, जलाशयों में पर्याप्त पानी और सरकारी समर्थन योजनाओं ने इस वृद्धि को मजबूती दी।
महिंद्रा, एस्कॉर्ट्स और वीएसटी टिलर्स ने क्रमशः 21 प्रतिशत, 28 प्रतिशत और 17 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की।
तीन-पहिया वाहन सेगमेंट में महिंद्रा और टीवीएस ने क्रमशः 81 प्रतिशत और 61 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन सेगमेंट में साल-दर-साल 74 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस बाजार में टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत, महिंद्रा की 23 प्रतिशत और मारुति सुजुकी की 5 प्रतिशत रही।



