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भंसाली जी खरगोश की तरह हैं: रणवीर सिंह

ranveer-solo-1448644274एनर्जेटिक रणवीर सिंह जल्द ही फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में डिफरेंट किरदार में नजर आएंगे। यह संजय लीला भंसाली के निर्देशन में उनकी दूसरी फिल्म है। इतना ही नहीं, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा के साथ भी वे दूसरी बार काम कर रहे हैं। पेश है फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’  और रणवीर के कॅरियर को लेकर हुई बातचीत…
 
भंसाली के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
भंसाली जी तो बिलकुल खरगोश की तरह हैं। एक तो बहुत ही क्यूट हैं। सेट पर सुबह पहुंचते ही उनका दिमाग एकदम भागने लगता है। फिर वे इधर से उधर ही करते नजर आते हैं और उस समय सेट पर मौजूद सारे टेक्नीशियन व एक्टर्स को उन्हें समझने के लिए उनके पीछे भागना होता है। 
 
बाजीराव के जीवन के बारे में कितना जान सके?
काफी कुछ सीखने का मौका मिला। उस समय उन जैसा हर विधा में पारंगत कोई योद्धा ही नहीं रहा होगा। इस लिहाज से मुझे यकीन है कि लोग मुझे उनके किरदार में पसंद जरूर करेंगे।
 
आप शूटिंग के दौरान घायल हुए थे तो क्या उसका दर्द जिंदगी भर याद रहने वाला है?
जी हां, बहुत। मेरा दायां कंधा पूरी तरह से फट गया था। उस समय सोच में पड़ गया था कि तलवारबाजी से लेकर घुड़सवारी तक में कंधे की बड़ी जरूरत पडऩे वाली है। बस, मैंने हार नहीं मानी और लग गया। उस दर्द भरी अवस्था में भी मेरा एनर्जी लेवल इतना हाई रहता था कि सेट पर मौजूद लोग मुझसे पूछते थे, आखिर मैं ऐसा कैसे कर लेता हूं। अपने कैरेक्टर के साथ पूरा न्याय किया है, जो जल्द ही आप सभी के सामने होगा। 
घुड़सवारी और तलवारबाजी कितने समय में सीख पाए?
समय तो लगा, क्योंकि पहले तो मैंने रिकवर होने के लिए जिम को तवज्जो दी। फिर शूटिंग डेट क्लीयर होते ही मैं प्रैक्टिस में लग गया था। वाकई में मैंने उन पलों को काफी एंजॉय किया। 
 
दीपिका के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
वाकई में मेरी उनके साथ जर्नी काफी अच्छी रही। इससे पहले भी बड़े पर्दे पर हमारी जोड़ी को सराहा गया था। मैं खुश हूं कि मैं एक्टर के तौर पर दीपिका के साथ केमिस्ट्री सही से बिठाने में सफल रहा। वाकई में दीपिका गजब की एक्ट्रेस हैं। हालिया रिलीज ‘तमाशा’ में रणबीर के साथ भी उन्होंने ऑसम एक्टिंग की है। 
 
उस जमाने में भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हुआ करते थे। इस बारे में क्या कहेंगे?
पर्सनली देखा जाए तो यह सब आपके दिल पर निर्भर करता है। फिल्म कम्प्लीट होने पर पता चला कि उस जमाने के लोग भी अपने दिल की ही सुनते थे। 
 
‘दिल धड़कने दो’ जैसी फिल्म में मिली कुछ विफलता को किस लिहाज से देखते हैं?
नहीं, मुझे तो नहीं लगता कि वह विफल रही थी। वैसे भी इंडस्ट्री की हर फिल्म में थोड़ा-बहुत तो नफा नुकसान लगा ही रहता है। अब उस सफलता या विफलता को आप किसी एक के सिर पर नहीं डाल सकते। 
 
हर एक्टर मेरी ही तरह अपना 100 प्रतिशत देता है, लेकिन उसके पीछे एक टीम और कई तरह के फैक्टर्स का भी हाथ होता है। मेरा मानना है कि हर ईमानदार एक्टर को पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।

 

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