
नई दिल्ली: दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने राजधानी के 45 झुग्गी-झोपड़ी यानी जेजे क्लस्टर्स के ‘इन-सीटू’ पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत करीब 21,229 परिवारों को उनकी मौजूदा जगह पर ही पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे एक लाख से अधिक लोगों को फायदा मिलने की संभावना है। पुनर्वास के साथ अतिरिक्त आवास और व्यावसायिक विकास के लिए जमीन उपलब्ध होने की भी उम्मीद है।
135.74 एकड़ में 15 परियोजनाओं पर तैयारी
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में 135.74 एकड़ क्षेत्र में फैले 45 जेजे क्लस्टर्स के लिए 15 परियोजनाओं से जुड़ी व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। DDA ने इसके लिए तीन लेनदेन सलाहकारों की नियुक्ति को लेकर प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
इन सलाहकारों की मदद से अलग-अलग क्लस्टर्स में पुनर्वास की जरूरत, विकास की संभावनाओं और बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा।
मास्टर प्लान 2047 से बड़े स्तर पर पुनर्वास की तैयारी
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने अगस्त में ‘मास्टर प्लान ऑफ दिल्ली 2047’ को अधिसूचित किया था। इसके बाद दिल्ली में ऊंची इमारतों और अधिक घनी आबादी वाले नए इलाकों के विकास का रास्ता साफ हुआ है।
इस योजना के तहत 650 से अधिक जेजे क्लस्टर्स में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों को उनकी मौजूदा जगह पर ही पुनर्वासित करने की योजना है।
लेनदेन सलाहकारों का किया जाएगा चयन
परियोजनाओं के लिए लेनदेन सलाहकारों का चयन आर्थिक मामलों के विभाग या नेशनल लैंड मॉनेटाइजेशन कॉरपोरेशन के साथ सूचीबद्ध फर्मों में से किया जाएगा। चयनित सलाहकार संबंधित क्लस्टर्स की पुनर्वास जरूरतों के साथ वहां विकास और बुनियादी ढांचे की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे।
आर्थिक व्यवहार्यता भी जांचेगा DDA
DDA अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता की भी जांच की जाएगी। इसके आधार पर परियोजनाओं को लागू करने के लिए उपयुक्त मॉडल सुझाए जाएंगे। व्यवहार्यता रिपोर्ट से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी और वित्तीय रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलेगी।
क्या होता है इन-सीटू पुनर्वास
इन-सीटू पुनर्वास का मतलब है कि झुग्गी में रहने वाले लोगों को किसी दूसरे स्थान पर भेजने के बजाय उसी जगह नए मकान बनाकर दिए जाएं। इससे लोगों को अपना मौजूदा इलाका छोड़कर दूर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें बेहतर आवास मिल सकेगा।
DDA के मुताबिक, इस मॉडल के तहत पुनर्वास के साथ अतिरिक्त आवासीय इकाइयां और व्यावसायिक स्थान भी विकसित किए जा सकते हैं। इससे नए मकान और दुकानें तैयार होने के साथ बड़ी आबादी की आवासीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।



