झारखंड के जंगलों में बनाए जाएंगे 6 हजार कच्चे चेकडैम, जल संरक्षण के साथ वन्यजीवों और मछली पालन को मिलेगा बड़ा सहारा

रांची। झारखंड के जंगलों में जल संरक्षण को मजबूत करने और भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर कच्चे चेकडैम बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के वन क्षेत्रों में करीब 6 हजार कच्चे चेकडैम तैयार किए जाएंगे। इन चेकडैमों के जरिए न केवल वर्षा जल का संरक्षण होगा, बल्कि वन्यजीवों को गर्मियों में स्थायी जलस्रोत भी उपलब्ध हो सकेगा।
जानकारी के मुताबिक पहाड़ियों से उतरने वाली छोटी जलधाराओं और नलिकाओं को विभिन्न स्थानों पर बांधकर ये कच्चे चेकडैम बनाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जमीन के ऊपर जल उपलब्ध रहेगा और भूगर्भ जल स्तर में भी सुधार होगा।
गर्मी में वन्यजीवों के लिए बनेंगे प्राकृतिक जलस्रोत
बांधवगढ़ वन क्षेत्र में इस तरह का प्रयोग कर चुके केंद्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि जंगलों में जल की उपलब्धता बढ़ने से वन्यजीवों को गर्मियों में काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन चेकडैमों के जरिए मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहेगी, जिससे हरियाली बढ़ेगी और जंगलों में बायोमास में भी वृद्धि दर्ज की जाएगी।
उन्होंने बताया कि बरसात शुरू होने से पहले इन चेकडैमों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राज्य के जंगलों में पहले से मौजूद हजारों पुराने चेकडैमों की पहचान कर उनकी मरम्मत भी कराई जाएगी।
एक लाख मिलियन लीटर तक बढ़ सकती है जल उपलब्धता
पर्यावरणविद और रांची विश्वविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के अध्यापक नीतिश प्रियदर्शी ने कहा कि इस पहल से राज्य में करीब एक लाख मिलियन लीटर अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सकता है। उन्होंने बताया कि वाटर रिचार्ज बढ़ने से पानी लंबे समय तक जमीन के ऊपर और भीतर संरक्षित रहेगा।
उन्होंने कहा कि जंगलों की प्राकृतिक जल पुनर्भरण संरचनाएं अतिक्रमण और बड़े पैमाने पर वृक्ष कटाई के कारण प्रभावित हुई हैं। ऐसे में कच्चे चेकडैम जल संरक्षण की दिशा में प्रभावी विकल्प साबित हो सकते हैं।
मछली पालन और रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों में बनाए जाने वाले ये वाटर रिचार्ज पिट और चेकडैम ग्रामीण आजीविका का भी नया माध्यम बन सकते हैं। इन जलाशयों का उपयोग मछली पालन के लिए किया जाएगा, जिससे स्थानीय ग्राम समितियों को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
वन क्षेत्रों में पहले से मौजूद बड़े बांधों में मछली पालन किया जा रहा है। अब योजना है कि कच्चे चेकडैमों में भी तेजी से विकसित होने वाली मछलियों की प्रजातियां डाली जाएं, ताकि स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा सके।
जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की दिशा में अहम पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे झारखंड के वन क्षेत्रों में जल संकट कम होगा, हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा। साथ ही वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।



