हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में राज्यसभा सीट पर सियासी हलचल तेज, कांग्रेस ने बुलाई विधायक दल की बैठक; बाहरी चेहरों की एंट्री से बढ़ी खींचतान

शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। एक सीट के लिए 5 मार्च को नामांकन होना है, लेकिन उससे पहले ही दावेदारों की लंबी सूची ने कांग्रेस के भीतर मंथन तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दिल्ली में डटे हुए हैं और शीर्ष नेतृत्व से लगातार संपर्क में हैं।

5 मार्च को नामांकन, सुबह होगी विधायक दल की बैठक

5 मार्च को शिमला में राज्यसभा की एक सीट के लिए नामांकन भरे जाएंगे। उसी दिन सुबह 11 बजे कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है। संसदीय कार्यमंत्री ने सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। बैठक में सर्वसम्मति बनाने के बाद ही प्रत्याशी नामांकन दाखिल करेगा।

दिल्ली में मंथन, राहुल गांधी से मुलाकात संभव

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सुक्खू दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से चर्चा कर रहे हैं और उनकी मुलाकात राहुल गांधी से हो सकती है। दावेदारों की सूची लंबी होने के कारण कांग्रेस आखिरी समय की रणनीति पर भी काम कर रही है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और पवन खेड़ा के नामों पर भी चर्चा चल रही है, जिससे सियासी समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं।

स्थानीय बनाम बाहरी चेहरा: अंदरखाने खींचतान

सूत्र बताते हैं कि कई विधायक और मंत्री हिमाचल से जुड़े नेता को ही राज्यसभा भेजने के पक्ष में हैं। चर्चा यह भी है कि किसी मंत्री को कैबिनेट से हटाकर राज्यसभा भेजने की रणनीति पर विचार हो रहा है।

हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल का नाम पहले से चर्चा में रहा है। दो नए नाम सामने आने के बाद अब गैर-हिमाचली दावेदारों की संख्या तीन तक पहुंच गई है, जिससे अंदरूनी असहमति की अटकलें तेज हैं।

आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह प्रमुख दावेदार

राज्य के भीतर से जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह शामिल हैं।

इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और पूर्व मंत्री आशा कुमारी के नाम भी चर्चा में हैं।

5 मार्च को नामांकन के बाद 16 मार्च को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान स्थानीय चेहरे पर दांव लगाता है या राष्ट्रीय स्तर के नेता को राज्यसभा भेजकर नया राजनीतिक संदेश देता है।

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