संपादकीय : मार्च 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी ने कभी कहा था ‘मानवता को युद्ध का अंत करना होगा, इससे पहले कि युद्ध मानवता का अंत कर दे।’ पश्चिम एशिया वर्तमान में एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठा है, जिसके फटने की आहट मात्र से पूरी दुनिया सहमी हुई है। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता सीधा टकराव अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है। वर्षों तक ‘छद्म युद्ध’ में उलझे रहने के बाद, अब दोनों देशों का आमने-सामने आना इस बात का संकेत है कि कूटनीति के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। इस युद्ध का सबसे भयावह पहलू इसका संभावित विस्तार है। इसका सीधा असर दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है, के बाधित होने से वैश्विक मुद्रास्फीति का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे विकासशील देशों की कमर टूट जाएगी और इसकी शुरुआत हो चुकी है। दुनिया एक और बड़े युद्ध की कीमत चुकाने की स्थिति में नहीं है। यदि वक्त रहते इस आग को नहीं बुझाया गया, तो इसके परिणाम आने वाली कई पीढ़ियों को भुगतने होंगे। शांति अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की अनिवार्य शर्त है।
उधर उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश में एक नए तरह की राजनीति शैली विकसित की है। जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की यह शैली चर्चा में है। धामी सरकार के ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान ने उत्तराखंड में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता का एक नया मानक स्थापित किया है। यह पहल केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन को सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का एक गंभीर प्रयास है। उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में, जहां दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों के लिए जिला मुख्यालयों तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती रही है, ऐसे में यह अभियान किसी वरदान से कम नहीं है। यह उत्तराखंड को एक अधिक जनकेंद्रित और प्रगतिशील राज्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है। बेशक इस अभियान पुष्कर सिंह धामी सरकार के लिए आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर सियासी ड्रामा चरम पर पहुंच गया है। राज्य सरकार जहां शंकराचार्य पर लगे यौन उत्पीड़न से जुड़े संगीन आरोपों की जांच कर रही है, वहीं यूपी के दो उप मुख्यमंत्री शंकराचार्य के सम्मान में पलक पावड़े बिछा रहे हैं। यह राजनीतिक विरोधाभास समझ के परे है। चुनाव पूर्व साल में यूपी की सियासत अलग ही दिशा में जा रही है। उधर शंकराचार्य ने गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की मांग को लेकर यूपी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। यह एक तरह से योगी सरकार के खिलाफ ‘धर्मयुद्ध’ का ऐलान है। बिहार में नीतीश कुमार का दिल्ली कूच ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के उस पुराने दौर के समापन जैसा है, जिसे उन्होंने लालू प्रसाद यादव और सुशील मोदी के साथ मिलकर दशकों तक चलाया था। अब बिहार एक ऐसी राजनीति की ओर बढ़ रहा है जहां बीजेपी का पूर्ण प्रभुत्व और जेडीयू का निशांत कुमार जैसा नया चेहरा सत्ता के केंद्र में होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना ‘नीतीश’ के बिहार का विकास और जातीय समीकरण किस दिशा में मुड़ते हैं। ‘दस्तक टाइम्स’ के इस अंक में तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की रिपोर्ट आपको समकालीन मुद्दों पर चिंतन करने की एक नई दिशा देगी।



