
हरदोई-कन्नौज के बीच गंगा पर बनेगा नया पुल, 288 करोड़ की परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी, 4 लाख लोगों की राह होगी आसान
हरदोई और कन्नौज के बीच लंबे समय से पुल की मांग अब पूरी होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गंगा नदी पर चियासर घाट के पास नए पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के पूरा होने से कटियारी क्षेत्र समेत आसपास के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और आवागमन की बड़ी समस्या खत्म होगी।
ईपीसी मॉडल पर होगा निर्माण, 288 करोड़ से ज्यादा खर्च
हरपालपुर क्षेत्र के जीवनपुरवा मजरा देहलिया गांव के पास चियासर घाट पर बनने वाले इस पुल का निर्माण ईपीसी मॉडल पर कराया जाएगा। परियोजना की कुल लागत 288 करोड़ 99 लाख 22 हजार रुपये तय की गई है। इस पुल की मांग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार उठाई जा रही थी, जिसके बाद इसे स्वीकृति मिली है।
नाव ही था सहारा, बरसात में पूरी तरह कट जाता था संपर्क
अब तक इस इलाके में गंगा पार करने के लिए केवल नाव ही एकमात्र साधन था। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह व्यवस्था भी ठप हो जाती थी, जिससे दोनों किनारों पर रहने वाले लोगों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को इससे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
चार लाख आबादी को मिलेगा सीधा लाभ
पुल के निर्माण से हरदोई और कन्नौज की करीब चार लाख आबादी को सीधा फायदा होगा। इसके साथ ही कटियारी क्षेत्र का संपर्क छिबरामऊ, गुरसहायगंज, कन्नौज, कानपुर और फर्रुखाबाद जैसे प्रमुख शहरों से बेहतर हो जाएगा। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग-34 और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से भी जुड़ जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
दूरी होगी कम, समय और खर्च दोनों की बचत
अभी तक कन्नौज पहुंचने के लिए लोगों को करीब 80 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था, जबकि सीधी दूरी महज 30 किलोमीटर है। पुल बनने के बाद यह दूरी काफी कम हो जाएगी, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों में कमी आएगी।
पहले पैंटून पुल भी नहीं दे पाया राहत
करीब दो साल पहले चियासर घाट पर पैंटून पुल के निर्माण को मंजूरी मिली थी, लेकिन वह स्थायी समाधान साबित नहीं हो सका। गंगा के जलस्तर में बदलाव और नदी के कई धाराओं में बंट जाने के कारण नाव संचालन भी कई बार बंद हो जाता था, जिससे देहलिया, सुलखामऊ, जीवनपुरवा, निकामदपुर, बेहटा लाखी, रामनगर, आलमपुर और हरपालपुर समेत कई गांवों के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।



