पंजाब में बड़ा कानूनी बदलाव संभव, 11 अप्रैल को कैबिनेट बैठक; गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट में संशोधन पर होगा फैसला

पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़े मामलों को लेकर कानून में बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 11 अप्रैल को कैबिनेट बैठक बुलाई है, जिसमें जागत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 में संशोधन के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद इस संशोधन को 13 अप्रैल को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में पेश करने की योजना है।
बेअदबी पर सजा का प्रावधान जोड़ने की तैयारी
सरकार इस एक्ट में संशोधन कर बेअदबी के मामलों में सजा का स्पष्ट प्रावधान शामिल करना चाहती है। मौजूदा कानून के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशन, वितरण और बीड़ के प्रबंधन का अधिकार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति को दिया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित किया जा सके। अब इसमें दंडात्मक प्रावधान जोड़कर इसे और सख्त बनाने की तैयारी है।
पिछला विधेयक ठंडे बस्ते में, नए रास्ते पर सरकार
इससे पहले 15 जुलाई 2025 को पंजाब सरकार ने पवित्र धर्मग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम से जुड़ा एक विधेयक पेश किया था, जिसमें सभी धर्मों के ग्रंथों को शामिल करते हुए 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, इसे चर्चा के बाद सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया और अब सरकार ने उस विधेयक को आगे बढ़ाने के बजाय मौजूदा एक्ट में संशोधन का रास्ता चुना है।
कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह राज्य का विधेयक है, इसलिए इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजना आवश्यक नहीं है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस कानून में सजा का प्रावधान जोड़ा जाता है, तो यह दंडात्मक कानून बन जाएगा और ऐसी स्थिति में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजना जरूरी हो सकता है।
पुराने बिलों को लेकर सियासत तेज
इस मुद्दे पर विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। शिरोमणि अकाली दल 2016 में अपने कार्यकाल के दौरान लाए गए बिल को लागू करने की मांग कर रहा है, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान पर उम्रकैद का प्रावधान था। वहीं कांग्रेस 2018 के संशोधित बिल को कानून बनाने की मांग कर रही है, जिसमें सभी धर्मों को शामिल किया गया था, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल सकी है।
13 अप्रैल को विधानसभा में पेश होगा प्रस्ताव
11 अप्रैल की कैबिनेट बैठक में संशोधन के अंतिम स्वरूप को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद इसे 13 अप्रैल को होने वाले विशेष विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले का पंजाब की राजनीति और कानून व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।



