स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा कूटनीतिक मोड़, पाकिस्तान के जरिए ईरान ने अमेरिका को भेजा बातचीत का प्रस्ताव

तेहरान/इस्लामाबाद में पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात के बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को बातचीत के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार यह प्रस्ताव गुरुवार शाम पाकिस्तान को सौंपा गया, जो फिलहाल दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के संकेत नहीं दे रहे हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से आगे बढ़ी कूटनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसी के जरिए यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक में इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और इसे स्वीकार करना मुश्किल बताया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर केंद्रित प्रस्ताव
ईरान के इस नए प्रस्ताव में सबसे अहम मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात को बहाल करना है। हालांकि, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को फिलहाल भविष्य की बातचीत के लिए टाल दिया है। अमेरिका को चिंता है कि यदि केवल जलमार्ग खोलने पर सहमति बनती है और परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो इससे कूटनीतिक दबाव कमजोर पड़ सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान के पास “परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच चुका यूरेनियम भंडार” मौजूद है, जिसे लेकर वॉशिंगटन सतर्क है।
ऊर्जा बाजार पर भी दिख रहा असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर अमेरिका के ईंधन बाजार पर पड़ेगा। वहीं, अगर जलमार्ग खोल दिया जाता है, तो ईरान पर दबाव कम होने की आशंका भी जताई जा रही है।
पहले दौर की वार्ता भी हो चुकी है असफल
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता भी रद्द हो गई थी। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से लौट गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान को अपनी मांगों की एक सूची सौंपी थी, जिसमें अमेरिका और इजरायल से जुड़ी शर्तें शामिल थीं।
इसके बाद अमेरिकी पक्ष ने भी अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना रद्द कर दी थी, जिसका नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर करने वाले थे। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है, क्योंकि इससे पहले हुई पहली दौर की बातचीत भी सफल नहीं हो पाई थी।



