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कोरबा के विकास की मजबूत नींव बना डीएमएफ, शिक्षा-स्वास्थ्य से अधोसंरचना तक विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार: मंत्री लखनलाल देवांगन

रायपुर: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के तहत वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को मंजूरी दे दी गई है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित शासी परिषद की बैठक में वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि डीएमएफ अब कोरबा जिले के विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।

बैठक में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया समेत शासी परिषद के सदस्य और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने की।

खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को मिलेगी नई दिशा

मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफ योजना लागू की गई, जिसके माध्यम से कोरबा जिले को बड़ी राशि प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अधोसंरचना विकास जैसे क्षेत्रों में डीएमएफ के जरिए तेजी से काम हो रहा है।

मंत्री ने बताया कि डीएमएफ मद से स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण और पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है ताकि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं ताकि आम लोगों को जल्द लाभ मिल सके।

निर्माण पोर्टल से आम लोग भी देख सकेंगे कार्यों की प्रगति

मंत्री देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि डीएमएफ के तहत होने वाले सभी विकास कार्य पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरे हों। इसके लिए निर्माण पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से आम नागरिक भी डीएमएफ से जुड़े कार्यों की जानकारी और प्रगति देख सकेंगे।

उन्होंने अधिकारियों को नियमित समीक्षा करने और बजट प्रावधान के अनुरूप नए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।

सांसद ज्योत्सना महंत ने गुणवत्ता और समय-सीमा पर दिया जोर

कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से कोरबा जिले को विकास की नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य जरूरी क्षेत्रों में इस फंड का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सांसद ने सभी परियोजनाओं को तय समय में और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने पर विशेष जोर दिया।

782 गांवों के लिए बनेगी पांच वर्षीय विकास योजना

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बैठक में जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तय किए गए केपीआई के अनुरूप तैयार की गई है। जिले के उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया है।

उन्होंने बताया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए तीन चरणों में व्यापक बेसलाइन सर्वे कराया जा रहा है। इसके तहत जिले के पांच विकासखंडों के 782 गांवों को शामिल कर आगामी पांच वर्षों की परिप्रेक्ष्य योजना तैयार की जाएगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 के लिए डीएमएफ राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल पर खर्च किया जाएगा।

शिक्षा क्षेत्र में 255 करोड़ रुपये के बजट से 16 पीएम स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित की जाएंगी। साथ ही नीट और जेईई की तैयारी के लिए आवासीय कोचिंग सुविधा भी शुरू की जाएगी।

वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 67.18 करोड़ रुपये की लागत से मोबाइल मेडिकल यूनिट और एम्बुलेंस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।

पेयजल और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

पेयजल संकट से निपटने के लिए 150 नए ट्यूबवेल और सौर ऊर्जा आधारित पंप लगाए जाएंगे। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण के तहत एंटी-स्मॉग गन और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर ग्रीन बेल्ट विकसित करने की योजना बनाई गई है।

बैठक में अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत इन सभी प्रयासों का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को स्थायी और आत्मनिर्भर आजीविका उपलब्ध कराना है।

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