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हरियाणा निकाय चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, हुड्डा के गढ़ में भी नहीं बची साख; गुटबाजी ने बिगाड़ा पूरा खेल?

चंडीगढ़: हरियाणा के शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। पार्टी एक भी प्रमुख सीट जीतने में कामयाब नहीं हो सकी। खास बात यह रही कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के कार्यकाल में यह पहला बड़ा चुनाव था, लेकिन नतीजों ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने कांग्रेस की आंतरिक कलह का पूरा फायदा उठाया, जबकि कांग्रेस नेता चुनावी मैदान में एकजुट नजर नहीं आए।

हुड्डा के प्रभाव वाले इलाके में भी कांग्रेस को झटका

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले सांपला नगर परिषद क्षेत्र में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका। हालांकि कांग्रेस ने यहां आधिकारिक प्रत्याशी नहीं उतारा था, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार अंकित शमशेर सिंह को पार्टी का समर्थन प्राप्त था। इसके बावजूद भाजपा सीट जीतने में सफल रही।

सोनीपत नगर निगम, जिसे लंबे समय से हुड्डा का मजबूत क्षेत्र माना जाता है, वहां भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस उम्मीदवार कमल दिवान टिकट मिलने के बाद ही उसे लौटाने की घोषणा कर चुके थे। बाद में पार्टी नेताओं ने उन्हें मनाकर चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन तब तक राजनीतिक संदेश जनता के बीच जा चुका था।

पंचकूला में कमजोर रणनीति ने बिगाड़ा समीकरण

पंचकूला नगर निगम चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुधा भारद्वाज को बेहद कमजोर प्रत्याशी माना गया। उन्हें हुड्डा विरोधी खेमे का चेहरा माना जाता है। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और विधायक चंद्रमोहन बिश्नोई की सिफारिश पर उन्हें टिकट मिला था।

हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं की सक्रियता बेहद सीमित दिखाई दी। कई वरिष्ठ नेता केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक ही सीमित रहे और जमीनी स्तर पर संगठनात्मक मजबूती नजर नहीं आई।

अंबाला और रेवाड़ी में भी नहीं चला कांग्रेस का जादू

अंबाला में कांग्रेस ने कुलविंदर कौर सैनी को मैदान में उतारा था। उन्हें पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक निर्मल सिंह का समर्थन हासिल था, लेकिन पार्टी के बाकी नेता उनके साथ मजबूती से खड़े नहीं दिखे। इसका असर सीधे चुनावी नतीजों पर पड़ा।

वहीं रेवाड़ी और धारूहेड़ा, जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, वहां भी कांग्रेस बुरी तरह हार गई। रेवाड़ी में पार्टी दूसरे स्थान पर रही, जबकि धारूहेड़ा में कांग्रेस तीसरे नंबर पर पहुंच गई।

इनेलो जीत नहीं सकी, फिर भी कई जगह दिखाई ताकत

इंडियन नेशनल लोकदल भी चुनाव में कोई बड़ी जीत दर्ज नहीं कर सकी, लेकिन कुछ सीटों पर उसने अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज कराई।

उकलाना की निर्दलीय उम्मीदवार रीमा सोनी को लेकर इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह दोनों ने उन्हें अपनी-अपनी पार्टी समर्थित उम्मीदवार बताया।

सोनीपत नगर निगम में इनेलो उम्मीदवार पांच हजार से ज्यादा वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रही। पंचकूला में भी इनेलो प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा।

आम आदमी पार्टी का भी फीका प्रदर्शन

पंचकूला में आम आदमी पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारा था, लेकिन पार्टी तीन हजार वोट का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी। इससे साफ संकेत मिले कि फिलहाल हरियाणा की शहरी राजनीति में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही बना हुआ है, हालांकि कांग्रेस अपनी अंदरूनी कलह से जूझती दिखाई दे रही है।

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