उत्तराखंड

बूढ़ा केदार धाम: देवभूमि का दिव्य ‘पांचवां धाम’, जहां नाथ संप्रदाय के योगी आज भी करते हैं पूजा-अर्चना

टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड की पावन भूमि अपने आध्यात्मिक वैभव और शिव आस्था के लिए जानी जाती है, और इन्हीं दिव्य स्थलों में से एक है टिहरी गढ़वाल की शांत वादियों में स्थित बूढ़ा केदार धाम। बालगंगा और धर्मगंगा नदियों के पवित्र संगम के समीप बसा यह प्राचीन शिवालय श्रद्धा, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम माना जाता है।

यह स्थल केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, जिसे देवभूमि का ‘पांचवां धाम’ भी कहा जाता है। घने देवदार और बांज के जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र के निकट स्थित होने के कारण प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वातावरण में श्रद्धालुओं को दिव्यता का अनुभव कराता है।

नाथ संप्रदाय की परंपरा और अनूठी पूजा व्यवस्था

बूढ़ा केदार धाम की सबसे खास विशेषता यह है कि सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार यहां पूजा-अर्चना का दायित्व केवल नाथ संप्रदाय के योगियों के पास होता है। यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाई जाती है, जो इस धाम की आध्यात्मिक विशेषता को और अधिक गहरा बनाती है।

महाभारत काल से जुड़ा पौराणिक इतिहास

इस पवित्र धाम का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को अपने ही परिजनों के वध का दोष लगा था। इस पाप से मुक्ति के लिए वे भगवान शिव की खोज में निकले। कथा के अनुसार, भगवान शिव ने यहां एक वृद्ध ब्राह्मण के रूप में पांडवों को दर्शन दिए और बाद में अंतर्ध्यान होकर शिवलिंग में समाहित हो गए। इसी कारण इस स्थान को ‘बूढ़ा केदार’ के नाम से जाना जाता है।

पंचम धाम के रूप में विशेष मान्यता

स्कंद पुराण के केदारखंड में वर्णित यह पवित्र स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे ‘पंचम धाम’ के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है, जहां वर्षभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अन्य हिमालयी धामों के विपरीत यहां कपाट पूरे वर्ष खुले रहते हैं, जिससे भक्तों को निरंतर दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है।

मुख्यमंत्री धामी ने साझा किया विशेष संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पावन धाम का वीडियो साझा करते हुए इसे आस्था और अध्यात्म का अद्भुत केंद्र बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से टिहरी आगमन पर इस दिव्य स्थल के दर्शन अवश्य करने का आग्रह किया।

आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम

टिहरी शहर से लगभग 60 किलोमीटर और ऋषिकेश से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित बूढ़ा केदार धाम आज भी श्रद्धा, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम उदाहरण बना हुआ है, जहां पहुंचकर हर श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।

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