मध्य प्रदेशराज्य

Twisha Case: हाईकोर्ट में MP सरकार का बड़ा दावा, ‘ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान संघर्ष की ओर इशारा करते हैं’

भोपाल: मॉडल और पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा मौत मामले में बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बड़ा खुलासा सामने आया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशान यह संकेत देते हैं कि मौत से पहले किसी तरह का संघर्ष या हाथापाई हुई हो सकती है। सरकार की इस दलील के बाद अब तक आत्महत्या माने जा रहे मामले में नए सवाल खड़े हो गए हैं और जांच की दिशा भी बदलती नजर आ रही है।

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ट्विशा की कलाई, कोहनी और सिर पर चोट के निशान पाए गए थे। उन्होंने दलील दी कि ये चोटें शव को नीचे उतारने के दौरान आईं, ऐसा मानना उचित नहीं होगा। सरकार का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कई गंभीर परिस्थितियों की ओर संकेत कर रही है।

मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उस याचिका पर हो रही थी, जिसमें ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। राज्य सरकार ने कोर्ट में आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह द्वारा ट्विशा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था।

शादी के बाद तानों और प्रताड़ना का आरोप

सरकार ने अदालत को बताया कि ट्विशा के परिवार द्वारा शादी में कथित तौर पर कम खर्च किए जाने को लेकर उसे लगातार ताने दिए जाते थे। आरोप है कि पति और सास दोनों मिलकर मानसिक दबाव बनाते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

‘जांच में सहयोग नहीं किया गया’

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने गिरिबाला सिंह पर जांच एजेंसियों का सहयोग न करने का आरोप भी लगाया। तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 13 और 14 मई को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन आरोपी पक्ष जांच में शामिल नहीं हुआ। सरकार ने यह भी कहा कि जब पुलिस नोटिस देने उनके घर पहुंची, तब भी वह मौजूद नहीं मिलीं।

सरकार ने अदालत में दावा किया कि आरोपी पक्ष ने मामले को प्रभावित करने और संभावित रूप से साक्ष्यों पर असर डालने की कोशिश की। साथ ही यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने अग्रिम जमानत देते समय आरोपी के प्रभावशाली पद और परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

मीडिया में बयानबाजी पर भी उठे सवाल

ट्विशा केस में सुनवाई के दौरान मीडिया से लगातार बातचीत का मुद्दा भी अदालत में उठा। तुषार मेहता ने कहा कि जांच में सहयोग करने का समय नहीं था, लेकिन मीडिया के सामने बयान देने के लिए पर्याप्त समय था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए एक विशेष नैरेटिव तैयार करने और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

व्हाट्सएप चैट्स का भी अदालत में जिक्र

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि गिरिबाला सिंह को उदार और सहयोगी महिला के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है, जबकि व्हाट्सएप चैट्स कुछ अलग तस्वीर दिखाती हैं। कोर्ट में पेश दलीलों के अनुसार, ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई बातचीत में बार-बार समझौता करने और सास के साथ रिश्ते संभालने की बात सामने आई।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि चैट्स से संकेत मिलता है कि सास के कारण पति-पत्नी के रिश्तों में दूरी बढ़ रही थी।

ट्विशा के परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में कहा कि अग्रिम जमानत ऐसे बयान के आधार पर दे दी गई, जिसे संदर्भ से हटाकर पेश किया गया था। उन्होंने दलील दी कि एफआईआर दर्ज होने के शुरुआती चरण में ही बिना जांच की प्रकृति समझे राहत दे दी गई।

लूथरा ने अदालत में व्हाट्सएप चैट्स का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ट्विशा के ससुराल पक्ष ने उसके बच्चे की पितृत्व तक पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि यह किसी भी महिला के लिए बेहद क्रूर स्थिति हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि ट्विशा का गर्भपात हुआ था।

‘मेरा दम घुटता है यहां’ — कोर्ट में पढ़ा गया मैसेज

सुनवाई के दौरान ट्विशा द्वारा अपनी मां को भेजा गया एक मैसेज भी अदालत में पढ़ा गया। लूथरा ने बताया कि ट्विशा ने लिखा था, “ये सब बहुत ज्यादा निर्दयी हैं, कोई दया नहीं है, मेरा दम घुटता है यहां।” परिवार की ओर से दावा किया गया कि अंतिम दिनों में ट्विशा मानसिक रूप से बेहद परेशान और डरी हुई थी।

CBI ने पति समर्थ सिंह को हिरासत में लिया

मामले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब सीबीआई ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह को हिरासत में ले लिया। राज्य सरकार ने सीबीआई की कस्टडी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि जमानत की शर्तों के बावजूद जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया गया।

सरकार ने अदालत में कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका पर आरोप लगाए गए, जबकि वह अब अपनी बात रखने के लिए इस दुनिया में नहीं है।

12 मई को मिली थी ट्विशा की लाश

गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। परिवार ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। एफआईआर के मुताबिक, 9 दिसंबर 2025 को हुई शादी में दिए गए दहेज से आरोपी पक्ष संतुष्ट नहीं था।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब ट्विशा के माता-पिता ने शुरुआती जांच पर सवाल उठाए। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर एम्स दिल्ली की टीम से दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया। अब सभी की नजर हाईकोर्ट के उस फैसले पर टिकी है, जिसमें गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने को लेकर आदेश सुनाया जाना है।

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