ट्विशा शर्मा केस में बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की

भोपाल: मध्यप्रदेश के चर्चित ट्विशा शर्मा मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने कहा कि निचली अदालत ने मामले के तथ्यों, गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों पर पर्याप्त गंभीरता से विचार नहीं किया था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप केवल समर्थ सिंह तक सीमित हैं।
CBI की मांग पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ जरूरी है और इसी आधार पर अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।
जबलपुर हाईकोर्ट में वैकेशन जज देव नारायण मिश्रा की अदालत ने 17 पन्नों के आदेश में भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत द्वारा 15 मई 2026 को दिए गए अग्रिम जमानत आदेश को निरस्त कर दिया।
गर्भपात को लेकर दबाव बनाने के आरोप
हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं 80(2), 85, 3(5) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धाराओं 3 और 4 के तहत दर्ज मामले में यह फैसला सुनाया।
अदालत ने कहा कि यह स्वीकार तथ्य है कि मृतका ट्विशा शर्मा गर्भवती थीं और दो महीने के भीतर उनका गर्भपात कराया गया था।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह ने ट्विशा पर गर्भपात कराने के लिए दबाव बनाया था। हालांकि बचाव पक्ष का कहना था कि ट्विशा स्वयं गर्भपात चाहती थीं।
गवाहों के बयान बने अहम आधार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में रेखारानी शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, नवनिधि शर्मा, हर्षित शर्मा और राशि अबरोल के बयानों का उल्लेख किया।
अदालत ने कहा कि 13 मई 2026 से ही गवाहों ने यह आरोप लगाए थे कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे द्वारा ट्विशा को प्रताड़ित किया जा रहा था और गर्भपात के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि 14 और 15 मई को दर्ज अन्य बयानों में भी दोनों आरोपियों के खिलाफ स्पष्ट आरोप सामने आए हैं।
व्हाट्सएप चैट्स का भी हुआ जिक्र
अदालत ने मामले से जुड़ी व्हाट्सएप चैट्स का भी उल्लेख किया और कहा कि इन चैट्स से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोप केवल समर्थ सिंह के खिलाफ हैं।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट ने इन महत्वपूर्ण तथ्यों पर समुचित विचार नहीं किया था, इसलिए अग्रिम जमानत आदेश को रद्द किया जाना आवश्यक था।
पीड़ित परिवार ने फैसले का किया स्वागत
पीड़ित परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ट्विशा मामले में आखिरकार न्याय हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह 36 वर्षों तक न्यायिक सेवा में रही हैं, इसलिए उन्हें कानून का सम्मान करते हुए सीबीआई के सामने आत्मसमर्पण कर जांच में सहयोग करना चाहिए।
पति समर्थ सिंह सीबीआई हिरासत में
इस बीच भोपाल की एक अदालत ने ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह को सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। बाद में सीबीआई की टीम समर्थ को लेकर कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के घर भी पहुंची, जहां मामले में आगे की जांच की गई।
गौरतलब है कि पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। इसके बाद मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आ गया था।
सीबीआई ने हाल ही में मध्यप्रदेश पुलिस की एफआईआर को दोबारा दर्ज करते हुए समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया है।



