चंबल अभयारण्य में घड़ियालों की खुशखबरी, 600 अंडों से निकल रहे नन्हे मेहमान; संरक्षण अभियान को मिली बड़ी सफलता

मुरैना: राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में घड़ियाल संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अभयारण्य के पालिघाट क्षेत्र में चार अलग-अलग घोंसलों से करीब 100 घड़ियाल शावक सुरक्षित रूप से बाहर निकल आए हैं। गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति माने जाने वाले घड़ियालों की संख्या बढ़ने की यह खबर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के निकट स्थित इस क्षेत्र में घड़ियालों के नवजात बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और घोंसले वाले संवेदनशील इलाकों पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार का खतरा टाला जा सके।
100 शावकों के सुरक्षित बाहर आने से बढ़ी उम्मीदें
वन अधिकारियों के मुताबिक पालिघाट क्षेत्र में घड़ियालों के बच्चों का सुरक्षित जन्म संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है। अभी केवल चार घोंसलों से करीब 100 शावक बाहर आए हैं, जबकि आने वाले दिनों में अन्य घोंसलों से भी बड़ी संख्या में बच्चों के निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के उप वन संरक्षक मानस सिंह ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे घोंसले वाले क्षेत्रों और नदी किनारों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें तथा संरक्षण कार्यों में सहयोग करें।
अप्रैल में दिए गए थे 500 से 600 अंडे
वन विभाग के अनुसार अप्रैल की शुरुआत में पालिघाट और आसपास के रेतीले तटों पर बने 22 से 25 घोंसलों में घड़ियालों ने लगभग 500 से 600 अंडे दिए थे। सामान्यतः घड़ियाल के अंडों से बच्चे निकलने में करीब दो महीने का समय लगता है। इसी क्रम में मई के अंतिम सप्ताह से अंडों से शावकों के बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में घोंसलों से और अधिक शावकों के निकलने की संभावना है, जिससे घड़ियालों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
नवजात शावकों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम
घड़ियालों के बच्चों के लिए शुरुआती कुछ सप्ताह बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग ने घोंसले वाले क्षेत्रों के आसपास तीन तरफ सुरक्षा बाड़ लगाई है ताकि जंगली जानवरों के हमलों से बचाव किया जा सके।
कई संवेदनशील स्थानों पर मानव गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। विभाग का मानना है कि शुरुआती चरण में सुरक्षा सुनिश्चित करना संरक्षण अभियान की सफलता के लिए बेहद जरूरी है।
27.25 लाख रुपये से बनेगा आधुनिक पालन केंद्र
घड़ियाल संरक्षण को और मजबूती देने के लिए पालिघाट में 27.25 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक घड़ियाल पालन केंद्र विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इस केंद्र के शुरू होने के बाद संरक्षण, निगरानी और प्रजनन संबंधी गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
तीन राज्यों की साझा धरोहर है चंबल अभयारण्य
करीब 5400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य देश के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है। यहां वर्तमान में 130 से अधिक वयस्क घड़ियाल मौजूद हैं।
यह अभयारण्य केवल घड़ियालों का ही नहीं, बल्कि मगरमच्छों, कछुओं, गंगा डॉल्फिन और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियों का भी सुरक्षित आवास है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें संयुक्त रूप से इस अभयारण्य के संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाती हैं।



